मृत अवस्था में पड़े थे पिता
इसी रंजिश को लेकर नेकचंद व उसका पिता सूबेदार रंजिश मानते हैं। शक होने पर वह पैदल-पैदल पीछे गया, तो देखा कि नेकचंद और उसके साथी उसके नए घर से बाहर निकले और भाग गए। अंदर जाकर देखा तो उसके पिता मृत अवस्था में पड़े थे। उसके पिता की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी।
जमींन बेचकर देना चाहता था रुपये
एडीजीसी इंद्रलता शुक्ला ने बताया कि विवेचना के दौरान पुलिस ने पाया कि शशि के मायके वाले मुकदमे में समझौते के लिए रुपयों की मांग कर रहे थे और राजकुमार जमींन बेचकर रुपये देना चाहता था, जबकि अवधेश और गजराज इसका विरोध कर रहे थे।
पेट दर्द का बहाना बनाकर रुक गया था घर
इसके तहत 11 जुलाई को शशि के मुकदमे की तारीख पर गजराज कचहरी चला गया और अवधेश पेट दर्द का बहाना बनाकर घर पर ही रुक गया। इसके बाद में पिता की हत्या कर दी और नेकचंद के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी। जिससे दबाव में आकर शशि के घरवाले मुकदमे में समझौता कर लें, रुपये भी न देने पड़े और जमींन भी बिकने से बच जाए।
अवधेश को हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई
विवेचक ने अवधेश व गजराज के खिलाफ हत्या व षड्यंत्र के आरोप में चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। अभियोजन की ओर से दस गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने घटनास्थल पर मौजूद रहे अवधेश को हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई, जबकि गजराज के खिलाफ हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने का कोई सबूत न होने पर उसे दोषमुक्त करार दे दिया।
कोर्ट में बयान से पलट गए थे दोस्त
एडीजीसी इंद्रलता शुक्ला ने बताया कि अवधेश के दोस्त विजय बहादुर व लाला उर्फ रमेश कुमार ने विवेचक को दिए बयान में कहा था कि घटना के दो दिन बाद अवधेश और उन लोगों ने मिलकर शराब पी थी तब अवधेश ने पिता की हत्या की बात बताई थी। कोर्ट में विजय ने बयान में कहा कि उसे अवधेश ने नहीं बल्कि लाला ने यह बात बताई थी जबकि लाला ने बयान में ऐसे कोई बात पुलिस को बताने से इनकार किया। लेकिन दोनों के बयान से पलटने का लाभ भी अवधेश को नहीं मिल सका।