इसमें आरोप लगाया कि पति 16 वर्ष की पुत्री के साथ लगातार दुष्कर्म कर रहा था। जानकारी होने पर पुत्री को जयपुर हॉस्टल में पढ़ने भेज दिया। इसके बाद भी पति पुत्री को जयपुर से बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। पति दोस्तों को साथ लेकर होटलों में जाता था।
नर्सिंग होम में करा दिया था गर्भपात
वहां पति व उसके दोस्त पुत्री के साथ सामूहिक दुष्कर्म करते थे। बेटी ने बताया कि पापा नशीली गोलियां खिलाकर दुष्कर्म करते थे। बाद में उनके दोस्त भी दुष्कर्म करते थे। बेटी गर्भवती हो गई तो उसकी दादी ने आवास विकास के नर्सिंग होम में उसका गर्भपात करा दिया था।
कोर्ट ने गवाह व साक्ष्य के आधार सुनाई सजा
पति ने दूसरी शादी कर ली। सास अक्सर पुत्री को पुत्र का मूड ठीक करने के लिए जबरन भेजती थी। विवेचक ने सभी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह ने गवाह व साक्ष्य के आधार पर शनिवार को लेखपाल पिता, दोस्त मनोज शाक्य, सोनू तिवारी उर्फ रत्नेश तिवारी, विमल कुमार, विष्णु शरन रस्तोगी को दोषी करार किया था।
दादी को भी ठहराया दोषी
नातिन का गर्भपात कराने में दादी को भी दोषी ठहराया है। साक्ष्य के अभाव में लालू उर्फ सुरजीत व राहुल उर्फ कुंती को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया था। दोष सिद्ध आरोपियों को कोर्ट ने जिला जेल भेज दिया था। सोमवार को न्यायाधीश ने दोषी लेखपाल पिता, उसके दोस्त मनोज शाक्य, सोनू तिवारी उर्फ रत्नेश तिवारी, विमल कुमार, विष्णु शरन रस्तोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई।
जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास की सजा
दुष्कर्म में गर्भवती होने पर नाबालिग नातिन का गर्भपात कराने में दोषी दादी को आठ वर्ष की सजा सुनाई। सभी दोषियों को 6.03 लाख रुपये जुर्माना जमा करने के आदेश दिए। जुर्माना नहीं देने पर दोषियों को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगने के आदेश दिए। कोर्ट ने दोषियों की जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने के आदेश दिए हैं।