बांदा जिले में पांच साल पहले एक व्यक्ति की दिनदहाड़े लाठियों से पीटकर हत्या करने के मामले में सोमवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने आठ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
दोषियों में एक मृतक का भाई और भतीजा भी शामिल है। कोर्ट ने अन्य धाराओं में भी अलग-अलग सजा और जुर्माना सुनाया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। साक्ष्यों के अभाव में दो लोग बरी हो गए।
कालिंजर थाना क्षेत्र के परसहर गांव की उज्जी देवी ने 27 जून 2015 को पति की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा व देवदत्त मिश्रा ने बताया कि उज्जी देवी अपने पति हीरालाल (40), बेटियों उर्मिला, सुनीता और भूरी के साथ दोपहर तीन बजे दबंग पड़ोसियों की शिकायत करने थाने जा रही थीं।
इसी बीच लाठी-डंडों से लैस पड़ोसी झम्मन यादव ने अपने साथियों संग घेर लिया और हमला बोल दिया। हीरालाल गंभीर रूप से जख्मी हो गए और उनकी नरैनी सीएचसी ले जाते समय मौत हो गई।
बताया कि झम्मन यादव एक महिला के हीरालाल के घर आने-जाने से नाराज रहता था। इसी के चलते उसने घटना को अंजाम दिया। उज्जी देवी ने थाने में झम्मन यादव, उनके तीन बेटों विश्वनाथ, रामसजीवन, रामसेवक, भाई दाऊ यादव, रामप्रताप, उसका बेटे छोटा, शिवमोहन, रामभरोसा और जगमोहन यादव के खिलाफ हत्या की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए। सोमवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने वकीलों की बहस और पत्रावलियों के अवलोकन के बाद मृतक के भाई रामप्रताप यादव व भतीजा छोटा यादव समेत झम्मन यादव, विश्वनाथ यादव, रामसजीवन यादव, रामभरोसा यादव, दाऊ यादव और शिवमोहन यादव को उम्रकैद और 10-10 हजार रुपये की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर 2-2 माह की अतिरिक्त जेल होगी। उधर, साक्ष्यों के अभाव में मौजूदा ग्राम प्रधान जगमोहन यादव और रामसेवक यादव को बरी कर दिया।