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बुंदेलखंड: बालू खदान और पुलिस का चोली-दामन का साथ, ओवरलोडिंग, अवैध विस्फोट क्रशर संचालकों की कमजोरी

Wed, 09 Sep 2020 11:21 PM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
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जेसीबी से किया जा रहा अवैध खनन - फोटो : अमर उजाला
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बुंदेलखंड में बालू खदान या पहाड़ ठेकेदार और क्रशर संचालकों का पुलिस के साथ हमेशा चोली-दामन का साथ रहता है। खनिज व्यवसायियों की यह मजबूरी भी है। पहाड़ और क्रशर संचालकों की कई कमजोरियां हैं। पुलिस इनका भरपूर फायदा उठा सकती है। यही वजह है कि पूरे बुंदेलखंड में फैले साढ़े 300 से ज्यादा स्टोन क्रशर मालिकों का याराना पुलिस से है।
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इस दोस्ती में कभी कोई पेंच पड़ा तो महोबा जैसी घटनाएं सामने आती हैं। कबरई (महोबा) के क्रशर और पहाड़ मंडी पूरे प्रदेश में अव्वल है। इसकी वजह यह है कि इस इलाके में पाया जाने वाला ग्रेनाइट पत्थर पूरे प्रदेश में सबसे अच्छी क्वालिटी का माना जाता है। लोक निर्माण विभाग ने भी इस पत्थर को अप्रूवल दे रखा है।

यही वजह है कि कबरई मंडी से पूरे साल रोजाना कई सैकड़ा ट्रक गिट्टी के पूरे प्रदेश के विभिन्न शहरों में जाते हैं। गिट्टी की रॉयल्टी दर बालू से 10 रुपये अधिक है। बालू की 150 रुपये और गिट्टी की 160 रुपये घनमीटर है। क्रशर संचालकों की पुलिस से सांठगांठ इसलिए मजबूरी है कि ट्रक में 12 से 14 घनमीटर तक ही गिट्टी भरने का रवन्ना/रॉयल्टी जारी होती है।
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जबकि ट्रकों में इससे दोगुना 30 घनमीटर तक गिट्टी लोड की जाती है। ऐसे में पुलिस ओवरलोड ट्रकों को रोककर चालान कर सकती है। दूसरा यह कि अधिकांश क्रशर संचालक ही पहाड़ों के पट्टे लिए हैं। पहाड़ों में चट्टाने तोडने के लिए विस्फोट करते हैं। इनके पास विस्फोट करने का लाइसेंस कम क्षमता का होता है। लेकिन विस्फोट कई गुना ज्यादा करते हैं।

अक्सर पहाड़ों में लगे मजदूर घायल या मौत का शिकार होते हैं। विस्फोट से पहाड़ के टुकड़े आसपास की बस्तियों में गिरते हैं और वहां हादसा हो जाता है। पहाड़ों के मजदूर और बस्तियों के बाशिंदे हंगामा करते हैं। इस संकट में पुलिस ही क्रशर संचालकों और पहाड़ पट्टाधारकों की संकट मोचक साबित होती है। फर्जी रवन्नों से भी पत्थरों की ढुलाई होती है।

पुलिस खफा हो तो फर्जी रवन्ने पकड़कर चालान करती है। महोबा में क्रशर कारोबारी के साथ हुई घटना और उसका तत्काल संज्ञान लेकर वहां के पुलिस अधीक्षक निलंबन इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। हालांकि आमतौर पर पिछला इतिहास यही है कि पुलिस और क्रशर संचालकों के रिश्ते अच्छे रहे हैं। लेन-देन की सेटिंग से दोनों फलते-फूलते रहे हैं। महोबा की घटना अपवाद स्वरूप देखी जा रही है।
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