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चित्रकूट: रेस्क्यू के बाद मुकुंदपुर जू सेंटर में तेंदुए की मौत, विभाग मौन

Sun, 08 Nov 2020 08:29 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
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मुकुंदपुर जू सेंटर में तेंदुए की मौत - फोटो : अमर उजाला
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चित्रकूट जिले की सीमा मानिकपुर से सटे परसमनिया धनिया बीट के जंगलों से शुक्रवार को रेस्क्यू किए गए नर तेंदुए की मुकुंदपुर जू सेंटर के अंदर मौत हो गई। शनिवार को तेंदुए को मृत अवस्था में पाया तो जू प्रबंधन समेत वन विभाग के आला अधिकारियों के पसीने छूट गए।
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मुकुंदपुर जू सेंटर में तेंदुए की मौत कई सवाल खडे़ कर रहा है। वन अधिकारियों के मुताबिक जब तेंदुआ रात में पूरी तरह स्वस्थ था तो उसकी मौत कैसे हो गई। क्या रेस्क्यू के दौरान ट्रैकुलाइज करने में किसी प्रकार की गड़बड़ी से तेंदुए की मौत हुई। इन सवालों के जवाब जू प्रबंधन के पास नहीं है।

इस मामले में वन अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। अभी तक प्रथम दृष्टया यह भी माना जा रहा है कि रेस्क्यू के दौरान उसे बेहोशी की दवा की ओवरडोज दे दी गई जिससे उसकी मौत होने की आशंका है।
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गौरतलब है कि शुक्रवार को तेंदुआ चित्रकूट जिले के रानीपुरवन जीव विहार क्षेत्र की ओर आते समय परसमनिया जंगल के धनिया वन बीट के आम रास्ते पर पहुंच गया था। आसपास की बस्ती में हमला भी किया था और राहगीरों के वाहनों को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया था।

इसे दस घंटे की मेहनत के दौरान कई बार ट्रैकुलाइज कर पकड़ लिया गया था। इसके बाद सतना डीएफओ राजेश राय ने कहा था कि तेंदुए को मुकुंदपुर जू सेंटर के जंगल में छोड़ दिया गया है। इधर 24 घंटे के अंदर ही तेंदुआ इस क्षेत्र में मृत अवस्था में मिला।

जानकारी होने पर महाराजा मर्तण्ड सिंह जू सेंटर से धनिया से रेस्क्यू कर लाए गए तेंदुआ को मृत देखकर अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जू प्रबंधन ने आनन-फानन मेें वन अधिकारियों को घटना की जानकारी दी।

मुकुंदपुर जू सेंटर में ही तेंदुए का पोस्टमार्टम करा कर जला दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम मेें की जानकारी मुकुंदपुर जू सेंटर के चहारदीवारी के बाहर खबर न जाए। इसके लिए अधिकारियों ने मातहतों को निर्देेश दिए। जिससे अधिकारियों व कर्मचारियों के मुंह बंद हैं। 

सतना डीएफओ राजेश राय ने बताया कि धनिया बीट के जंगल में एक ग्रामीण व वन रक्षक को घायल करने वाली बाघिन की तलाश में वनविभाग की टीम बीते तीन दिनों से लगी रही। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। हाथ लगा तो एक नर तेंदुआ रेस्क्यु के बाद इस दुनिया को अलविदा कह गया।
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इधर तीन दिनों से कभी तेंदुआ तो कभी बाघ के जंगल में घूमने की बात अधिकारी कर रहे हैं। अब बताया गया है कि वन कर्मियों पर हमला करने वाली बाघिन थी। इसकी पुष्टि के लिए वन विभाग टैप कैमरे की मदद से लोगों के सवाल का जवाब देने का प्रयास कर रहे हैं। 

दो वर्ष में सात तेंदुए की मौत
चित्रकूट। धनिया से रेस्क्यू कर मुकुंदपुर लाए गए नर तेंदुए की उम्र तकरीबन 10 वर्ष बतायी जा रही है। इसका वजन लगभग 65.70 किलो बताया जा रहा है। इसके नाखून भी गिर गए थे। इस क्षेत्र में दो दुर्गा व देविका नाम के दो तेंदुओं की मौत हो चुकी है। दो साल के अंदर इस क्षेत्र में सात तेंदुए की मौत हो चुकी है। 

उठ रहे सवाल 
- तेंदुए के अनुकूल जंगल के बाद रेस्क्यू क्यों 
- रेस्क्यू के दौरान बडे़ वन अधिकारियों की मौजूदगी नहीं 
- डाक्टरों ने कैसे मेडिकल चेकअप किया 
- अगर तेंदुआ स्वस्थ तो मौत कैसे हुई 
- मौत का कारण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया
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