टीम के सामने प्रस्तुत नहीं कर सके कोई साक्ष्य
इसके बाद सन् 1945 में एसपीजी ने लखनऊ डाइवोसिस ट्रस्ट ऑफ एसोसिएशन (एलडीटीए) को 14/88 ग्वालटोली की बिक्री की थी। इसके कोई साक्ष्य टीम के सामने प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद एलडीटीए ने वर्ष 2008 में बिना प्रशासन की अनुमति के 100 रुपये के स्टांप पर बिशप डायोसिस ऑफ लखनऊ चर्च ऑफ इंडिया को जमीन की बेच दी।
चार लोगों को जमीन की बिक्री की जा चुकी है
बीते चार साल से लखनऊ चर्च ऑफ इंडिया 100-100 वर्ग गज कर प्लाट की बिक्री कर रहा था। इसमें से करीब 450 वर्ग गज जमीन मोहम्मद सलीम बिरयानी को 450 वर्गगज, श्रेया सचान दो सौ वर्गगज व पूर्व मंत्री सौ-सौ गज के दो प्लाट 30 साल के लिए लीज पर दे दे दिए। करीब चार लोगों को जमीन की बिक्री की जा चुकी है।
रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी
दूसरी तरफ वर्ष 2021 में एलडीटीए ने फिर से करीब 19 हजार वर्ग मीटर जमीन का इरशाद, दानिश, अहमद व अनूप के नाम बैनामा कर दिया। यानी दोनों समिति के पदाधिकारियों ने बिना प्रशासन की अनुमति के नजूल की संपत्ति को दो-दो बार बिक्री कर दी। जांच टीम के सामने जमीन की दावेदारी कर रहे दोनों एसोसिएशन के पदाधिकारी कोई भी सही साक्ष्य टीम को नहीं दिखा पाए है। एडीसीपी सेंट्रल महेश कुमार का कहना है कि एपीफैनी कपांउड की जमीन मामले की प्रशासनिक जांच पूरी होने की जानकारी मिली है। रिपोर्ट मिलने पर उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।