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14 साल के इस एथलीट के सब हो जाते थे मुरीद, आखिर में मौत की तरफ दौड़कर भी जीत ले गया सबका दिल

Thu, 31 Aug 2017 07:31 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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उसकी दौड़ और उसकी उम्र देखकर ‌क‌िसी को अपनी आंखों पर यकीन नही होता था। महज 14 साल के इस बच्चे ने हर ‌‌‌क‌िसी को अपनी रफ्तार का मुरीद बना ‌ल‌िया था। आ़ज भी वह दौड़ा तो जीत के ‌ल‌िए था ले‌क‌िन उसे क्या पता था ‌की ये उसकी आ‌ख‌िरी दौड़ होगी।
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हमेशा दौड़ में पहले नंबर पर आने वाले दीपेंद्र  कैसे असुव‌‌िधाओं की बल‌ि चढ़ गया। च‌ित्रकूट से सटे व‌िनायकपुर के नवीं कक्षा के छात्र की अभ्यास करते हुए मौत हो गयी। दौड़ने का शौक रखने वाले दीपेंद्र अपने कॉलेज का सबसे तेज धावक था। वह ज‌ब ‌‌‌‌‌‌च‌ित्रकूट खेल प्र‌त‌ियो‌ग‌िता में पहले स्थान पाने वाले होनहार एथलीट को प्रशासन की लापरवाही की वजह से जान गवांनी पड़ी। जब वह कॉलेज के मैदान मेेंं अचानक बेहोश होकर गिरा। इस एथलीट को न तो समय से चिकित्सा सुविधा मिल पाई और और न ही समय रहते अस्पताल पहुंच पाया।  

चित्रकूट में क्षेत्रीय बाल क्रीडा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाले होनहार एथलीट जिले में खेल सुविधाएं न होने का शिकार हो गया। अभ्यास के दौरान अचानक बेहोश होकर गिरे एथलीट को न तो समय से चिकित्सा सुविधा मिल पाई और न ही अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर उसे बचा पाए। इस तरह एक उदयीमान जिले का सितारा काल के गाल में समा गया।
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गौरतलब है कि मुख्यालय से सटे गांव विनायकपुर निवासी रामचरण का का पुत्र दीपेंद्र कुमार चित्रकूट इंटर कॉलेज में कक्षा नौ का छात्र था। मंगलवार को जिला खेलकूद प्रतियोगिता के अभ्यास में दौड़ लगाते समय अचानक मैदान में गिर गया और उसकी मौत भी हो गई थी। हाल ही में मुख्यालय के एक कॉलेज में हुई क्षेत्रीय खेलकूद प्रतियोगिता में उसने दौड़ में दो मेडल प्राप्त किए थे। उसके पिता ने बताया कि 31 अगस्त से होने वाली जिला स्तरीय प्रतियोगिता की तैयारी के लिए वह मंगलवार को चित्रकूट इंटर कॉलेज के मैदान में अभ्यास करने गया था।

कॉलेज के शिक्षक फूलचंद्र चंद्रवंशी ने बताया कि किसी एथलीट को कॉलेज की ओर से नहीं बुलाया गया था। छात्र दीपेंद्र स्वत: ही अभ्यास के लिए आया था। जैसे ही एक मैदान का एक चक्कर लगाकर आया तो वह गिरकर बेहोश होने लगा। 

जिसेे देखकर वहां मौजूद खेल शिक्षक पीएन सिंह आदि उसे उठाकर शिक्षक कक्ष लाए और पानी के छींटे मारकर होश मेें लाने का प्रयास किया गया। कुछ देर तक उसे होश न आने पर परिजनों को सूचित कर जिला अस्पताल ले गए जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि जिले में खेलकूद के  पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। जिससे एथलीट नंगे पैर या फटे जूते पहनकर ही अभ्यास करते हैं। प्रतियोगिताओं के दौरान भी प्रतिभागियों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाती है। जिससे  प्रतिभाएं कुंठित होती हैं।
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:-असुविधाओं का शिकार हो गया होनहार एथलीट
:- जिले में खिलाड़ियों को नहीं मिलती पर्याप्त सुविधाएं
-अभ्यास के दौरान दौड़ लगाते समय हुई थी दीपेंद्र की मौत
 
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