सपा सरकार के शासन काल में बने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए हुए भूमि अधिग्रहण में फर्जीवाड़ा हुआ है। सामान्य जमीन को सड़क के किनारे दिखाकर सर्किल रेट बढ़ा दिया गया। सरकार से कई गुना ज्यादा मुआवजा वसूला गया। यूपीडा ने जांच शुरू की तो पोल खुलकर सामने आ गई। 51 काश्तकार ऐसे मिले, जिनकी जमीन को कई गुना ज्यादा रेट पर अधिगृहीत किया गया। इन सभी को रिकवरी के लिए नोटिस जारी की गई है।
यूपीडा और तहसील प्रशासन की इस कार्रवाई से हड़कंप मचा है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रक्रिया अगस्त 2014 में शुरू हुई थी। सिक्सलेन के इस एक्सप्रेसवे के लिए तिर्वा तहसील के 2700 काश्तकारों की जमीनें अधिगृहीत की गईं। अधिग्रहण के बदले काश्तकारों को चार गुना मुुआवजा देने की घोषणा की गई थी। एक्सप्रेसवे के लिए किसानों ने बिना किसी विरोध के बैनामा कर दिया था।
इन्हीं काश्तकारों में कुछ ऐसे थे जिन्होंने बैनामे से पहले लेखपालों और तहसील अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर खेल कर दिया। इन काश्तकारों की जमीनें सड़क से काफी दूर सामान्य क्षेत्र में थीं। इन्होंने लेखपालों ने सेटिंग कर जमीनों को सड़क किनारे दिखा दिया। इससे जमीन का सर्किल रेट बढ़ गया। काश्तकारों को जमीन के बदले कई गुना ज्यादा मुआवजा हासिल हुआ।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद इस खेल की सुगबुगाहट होने लगी। मामला शासन तक पहुंच गया। यूपीडा ने जांच शुरू की तो हकीकत सामने आ गई। जांच में तिर्वा तहसील क्षेत्र के पिपरौली, बस्ता, सत्सार, भुन्ना, बलनापुर, पट्टी गांव में करीब 51 काश्तकार ऐसे मिले, जिन्होंने सामान्य भूमि को सड़क के किनारे दिखाकर सर्किल, रेट बढ़ाकर मोटा मुनाफा लिया।
पिछले महीने यूपीडा ने बैनामों की जांच कर मुआवजा की अधिक धनराशि लेने वाले किसानों से रिकवरी के आदेश जारी कर दिए। यूपीडा के आदेश पर तहसील प्रशासन ने मुआवजे की राशि से रिकवरी के लिए इन 51 काश्तकारों को नोटिस देना शुरू कर दिया।
एसडीएम तिर्वा महेंद्र कुमार ने बताया कि 51 किसान ऐसे मिले जिन्होंने सामान्य भूमि का सड़क दर से मुआवजा ले लिया। इन्हें धनराशि जमा कराने के लिए नोटिस भेजी जा रही हैं। करीब सात किसानों ने अधिक ली गई राशि को जमा कर दिया है। अन्य किसानों से जल्द ही मुआवजे की अधिक राशि की वसूली की जाएगी।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक नजर
छह लेन चौड़े और 302 किमी लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की निर्माण प्रक्रिया अगस्त 2014 में शुरू हुई थी। 22 माह बाद नवंबर 2016 में इसका तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उद्घाटन किया था। फरवरी 2017 को यह आम जनता के लिए खोल दिया गया। 18 जनवरी 2018 से टोल टैक्स की वसूली शुरू हुई। कुल लागत 13200 करोड़ रुपये थी। यह आठ जिलों आगरा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, इटावा, कन्नौज, उन्नाव, कानपुर और लखनऊ से गुजरता है।