संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) में वेंटीलेटर न मिलने से शास्त्रीनगर की लक्ष्मी (ढाई साल) ने सोमवार को तड़प कर दम तोड़ दिया। बेहतर इलाज के लिए लक्ष्मी को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग से आईडीएच रेफर किया गया था, लेकिन वह आईडीएच की अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई।
बाल रोग के डॉक्टरों की अमानवीयता भी सामने आई है। लक्ष्मी को आईडीएच भेजने से पहले ऑक्सीजन सिलेंडर के नाम पर पांच सौ रुपये वसूले गए और फिर जाने को कह दिया। परिजनों ने 50 रुपये में रिक्शा किया और उस पर ऑक्सीजन सिलेंडर लादकर आईडीएच पहुंचे।
भर्ती के दौरान प्रिंसिपल का निरीक्षण चलने के कारण डॉक्टरों ने लक्ष्मी की ओर ध्यान ही नहीं दिया। लक्ष्मी की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया और भाग रहे डॉक्टर को कुर्सी पर बैठा दिया।
अस्पताल की सिस्टर पीएल मथूरिया ने परिजनों को सांत्वना देने की बजाय बच्ची का पोस्टमार्टम कराने और हैलट का सिलेंडर न वापस करने की धमकी देनी शुरू कर दी। बलिया के मूल निवासी ज्ञानेंद्र कुमार प्राइवेट लाइनमैन हैं। वह शास्त्रीनगर में रहते हैं।
कुछ दिन पहले उनकी बेटी लक्ष्मी को सर्दी-जुकाम हो गया था। शनिवार को हैलट में दिखाया तो डॉक्टरों ने उसे बाल रोग की इमरजेंसी में ले जाने को कहा। बाल रोग की इमरजेंसी में लक्ष्मी को भर्ती किया गया। सोमवार सुबह लक्ष्मी की हालत बिगड़ी तो बाल रोग के डॉक्टरों ने उसे आईडीएच रेफर कर दिया।
जिस समय लक्ष्मी को रेफर किया गया उसे ऑक्सीजन लगा हुआ था। डॉक्टरों ने लक्ष्मी को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ ही आईडीएच ले जाने को कहा, लेकिन उसके लिए एंबुलेंस नहीं मंगाई। ज्ञानेंद्र बेटी को लेकर जाने लगा तो उससे सिलेंडर की सिक्योरिटी के नाम पर पांच सौ रुपये लिए गए।
ज्ञानेंद्र ने एंबुलेंस मांगी तो उसे बताया गया कि यहां कोई एंबुलेंस नहीं है। खुद व्यवस्था करो। इसके बाद ज्ञानेंद्र ने 50 रुपये में रिक्शा तय किया और पत्नी फूलवती और बेटी के साथ रिक्शे पर सिलेंडर के साथ बैठ गया। वहां से सभी आईडीएच आए।
आईडीएच में जिस समय लक्ष्मी को लेकर परिजन पहुंचे उस समय प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार का निरीक्षण चल रहा था। प्रिंसिपल के निरीक्षण के कारण किसी डॉक्टर ने बच्ची की ओर ध्यान ही नहीं दिया। काफी देर बाद उसका सिलेंडर बदला जाने लगा तो चाबी ही नहीं मिल रही थी।
किसी तरह सिलेंडर बदला गया, लेकिन बच्ची को किसी डॉक्टर ने अटेंड नहीं किया। बच्ची की हालत बिगड़ती जा रही थी पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। सिस्टर ने एक घंटे बाद ड्रिप तो लगाई, लेकिन बिना स्टार्ट किए चली गईं। क्योंकि उनकी ड्यूटी का टाइम ओवर हो गया था। तकरीबन ढाई बजे लक्ष्मी ने दम तोड़ दिया।