आईआईटी के 47वें दीक्षांत समारोह में सोमवार को एमटेक, एमएससी, एमबीए और पीएचडी की डिग्री पाने वाले मेधावियों के चेहरे खुशी से चमक उठे। सबने डिग्री ली, फिर आडिटोरियम ग्राउंड में एकत्रित होकर मस्ती की। हवा में टोपी उछालकर हिप, हिप हुर्रे के नारे लगाए। परिवार के साथ ग्रुप फोटोग्राफ भी कराए।
समारोह में बीटेक का अच्छा प्रोजेक्ट बनाने वाले हिमांशु गुप्ता को प्रोफेसिएंंसी मेडल देकर सम्मानित किया गया। कला एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में अहम योगदान के लिए सोहम अदला को प्रशस्ति पत्र दिया गया है।
आईआईटी के 47वें दीक्षांत समारोह का शुभारंभ क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया के चेयरमैन आदिल जैनुलभाई, बोर्ड ऑफ गवर्नर (बीओजी) के चेयरमैन प्रो. एम. आनंद कृष्णन और डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने किया।
फिर पीएचडी, एमटेक , बीटेक-एमटेक डुवल डिग्री प्रोग्राम, एमडेस , एमबीए, एमएससी दो वर्षीय , एमएससी पांच वर्षीय और बीटेक के 510 स्टूडेंट्स को डिग्री देने का सिलसिला शुरू हुआ। सबसे पहले पीएचडी के 73 रिसर्च स्कॉलर मंच पर बुलाए गए। डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने सबको डिग्री दी।
इसके बाद एमटेक, एमएससी, बीटेक-एमटेक डुवल डिग्री प्रोग्राम सहित अन्य कोर्स के स्टूडेंट्स को मंच पर बुलाकर डिग्री दी। दीक्षांत समारोह में बीटेक स्टूडेंट्स को मेडल, डिग्री देने में प्राथमिकता दी जाती थी। पीजी, रिसर्च स्कॉलर अपने स्थान पर खड़े हो जाते थे और एक साथ डिग्री अवार्ड कर दी जाती थी।
इसको देखते हुए ही आईआईटी ने हर साल दो दीक्षांत समारोह कराने का फैसला किया है। यह पहला दीक्षांत समारोह था, जिसमें पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी डिग्रीधारियों को मंच पर बुलाया और डिग्री दी ।
दीक्षांत समारोह में ही ट्यूमर की पहचान और उसके इलाज में सफलता हासिल करने वाले चिकित्सक डॉ. राकेश जैन और फिजिक्स के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले मशहूर विज्ञानी प्रो. टीवी रामाकृष्णन को डॉक्टर आफ साइंस की मानद उपाधि भी दी गई।
डॉ. राकेश जैन ने कहा कि अब इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाली दवाइयां आ गई हैं। इनके इस्तेमाल से कैंसर रोगी की उम्र पांच साल तक बढ़ाई जा सकती है।
हालांकि यह इलाज 70 फीसदी मरीजों पर ही कारगर हुआ है। आगे की रिसर्च चल रही है। इस मौके पर डिप्टी डायरेक्टर प्रो. आरके चतुर्वेदी, प्रो. प्रभात मुंशी, प्रो. धीरज सांघी, डॉ. वीपी सिंह, सीपी सिंह, रवि शुक्ला, डॉ. आरके सचान मौजूद रहे।