शरीर में ब्लड शुगर लेवल का घटना (हाइपोग्लाइसीमिया) अधिक खतरनाक होता है। 54 मिग्रा के नीचे शुगर लेवल जाने से मस्तिष्क क्षतिग्रस्त होने लगता है। डायबिटीज एंड हार्ट रिसर्च सेंटर (डीएचआरसी) के निदेशक डॉ. एनके सिंह ने बताया कि अमेरिका में लो ब्लड शुगर पता करने के लिए कुत्ते प्रशिक्षित किए जा रहे हैं। रोगी की सांस सूंघकर कुत्ते पता कर लेते हैं कि खून में शुगर लेवल कम है। खून के सैंपल की जांच में यह देर में पता चल पाता है।
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डेमो पिक
कानपुर में आयोजित केडीएकॉन-2018 में धनबाद, झारखंड से शिरकत करने आए डॉ. एनके सिंह ने बताया कि ब्लड शुगर घटने से शरीर में आइसोप्रिन नाम के केमिकल का रिसाव होता है। यह केमिकल फेफड़ों में आ जाता है और सांस के साथ निकलता है।
प्रशिक्षित कुत्ते इसे पकड़ लेते हैं और अपने मालिक को संकेत देने लगते हैं। उन्होंने बताया कि 54 मिग्रा के नीचे ब्लड शुगर कम होना खतरनाक है। उन्होंने बताया कि 70 मिग्रा तक शुगर लेवल पहुंचने पर पसीना निकलना, घबराहट आदि लक्षण उभरने लगते हैं।
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शुगर लेवल घटे तो ग्लूकोज खाएं
अगर रोगी को शरीर में शुगर लेवल घटने के लक्षण आने लगें तो इधर-उधर मीठा खाने के बजाए तुरंत दो चम्मच ग्लूकोज खा लें। इससे शरीर में तुरंत शुगर लेवल बढ़ जाएगा।
सिर्फ व्यायाम से नहीं घटेगी शुगर
सिर्फ व्यायाम से शुगर नहीं घटेगी। इसके लिए जरूरी है कि सब्जी, अनाज और फलों में आने वाले घातक रसायनों से बचें। डॉ एनके सिंह ने बताया कि घातक रसायन युक्त फल, सब्जियां खाने पर रसायन अग्नाशय की बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। इससे डायबिटीज हो जाती है। सब्जियों, फलों को कम से कम तीन घंटे तेज पानी में धोएं। इस संबंध में जागरूकता फैलाने की जरूरत है।
ध्वनि प्रदूषण बढ़ा रहा डायबिटीज
लोगों को अंदाजा नहीं है, लेकिन ध्वनि प्रदूषण भी डायबिटीज का बड़ा कारण बन रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण से स्ट्रेस बढ़ता है। इससे एडिलीन रसायन का रिसाव होने लगता है। इससे शरीर में एस्ट्रोएड बनते हैं जो बीटा कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। ध्वनि 60 डेसीबिल होना चाहिए। इससे अधिक डेसीबिल होने पर स्ट्रेस बढ़ता है।