कानपुर। श्रम विभाग के हजारों श्रमिक क्वार्टरों में लगातार हो रहे कब्जों पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने बड़ी पहल की है। श्रमिक क्वार्टरों को बाउंड्री वॉल के अंदर लाने की योजना शासन ने बनाई है। इसके लिए 10 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान भी किया गया है। साथ ही विभाग से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मांगी गई है। इसे निर्माण के बाद फिर से किराया वसूलने की प्रक्रिया माना जा रहा है। नया किराया भी तय किया गया है।
शहर में शास्त्री नगर, जूही कला, किदवईनगर, जाजमऊ, बजरिया, गोविंद नगर, बाबूपुरवा, चकेरी, मकरावटगंज आदि क्षेत्रों में 18,035 श्रमिक क्वार्टर हैं। 1995 से इन श्रमिक क्वार्टरों का एलाटमेंट बंद है। फरवरी 2011 से किराया भी नहीं लिया जा रहा है। अब इन क्वार्टरों में अवैध कब्जा है। पहले ये क्वार्टर बाउंड्री वॉल के अंदर थे। शासन ने फिर से बाउंड्री वॉल बनाने के लिए बजट का प्रावधान किया है। बाउंड्री वॉल बन जाने के बाद किराया वसूली भी शुरू हो सकती है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डीपीआर बनाने के निर्देश शासन ने भेजे हैं।
इसलिए शुरू की जा रही कवायद
शहर में श्रम विभाग के 18,035 श्रमिक क्वार्टर हैं। जो शहर के अच्छे इलाकों में बने हुए हैं। इनमें तीन लाख से अधिक आबादी रहती है। मौजूदा समय में यहां की जमीनों की कीमत कई हजार करोड़ रुपये है। पूरे प्रदेश में 29 हजार से अधिक श्रमिक क्वार्टर हैं। ये लखनऊ, बरेली, बनारस, सहारनपुर, गोरखपुर, गाजियाबाद, आगरा, इलाहाबाद में हैं। यहां भी जमीन की कीमत करोड़ों में हैं। इन क्वार्टरों में ज्यादातर पर अवैध कब्जा है। श्रमिकों के स्थान पर डॉक्टर, वकील, उद्यमी, स्कूल संचालक रहे हैं। जो लगातार इन क्वार्टरों पर कब्जा करते जा रहे हैं।
श्रमिक क्वार्टरों का ब्योरा ऑनलाइन हुआ
कानपुर समेत प्रदेश भर के श्रमिक क्वार्टरों की आवंटन प्रक्रिया कोे पारदर्शी करने के लिए श्रम विभाग ने सभी क्वार्टरों का ब्योरा ऑनलाइन कर दिया है। इसकी ऑनलाइन मॉनीटरिंग भी होगी। इसके लिए विभाग ने एक खास सॉफ्टवेयर तैयार किया है, इसमें इन श्रमिक क्वार्टरों का पूरा डाटा अपलोड कर दिया गया है। मसलन कितने क्वार्टर हैं, यह किसे आवंटित हुआ है, कब आवंटित हुआ है। कब निरस्त हुआ। इसका पूरा ब्योरा ऑनलाइन कर दिया गया है। समय-समय पर होने वाले आवंटन, निरस्तीकरण की सूचना भी अपडेट होगी।