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शिक्षा व अच्छे संस्कार के लिए कोविंद ने दिए थे पांच लाख

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कानपुर देहात। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा सांसद रहने के दौरान झींझक कस्बे के बच्चों की शिक्षा व अच्छे संस्कार के लिए भी पहल की। उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर के नए भवन निर्माण के लिए सांसद निधि से पांच लाख रुपये दिए। इससे नहर किनारे पड़ी जमीन पर विद्यालय भवन का निर्माण हुआ।
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बात साल 2002 की है। झींझक कस्बे में सरस्वती शिशु मंदिर व विद्या मंदिर संचालित हुआ करता था।
उन दिनों विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका था। समिति के लोग कस्बा सहित क्षेत्र के नेताओं से नए भवन निर्माण की गुहार लगा रहे थे, लेकिन किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद जब मामला राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (तब राज्यसभा सांसद) के पास पहुंचा तो उन्होंने इस पर गंभीरता दिखाते हुए 2003 में सांसद निधि से पांच लाख रुपये दिए।
प्रधानाचार्य पं. सचिन त्रिपाठी बताते हैं कि सांसद निधि से विद्यालय के तीन कमरों का निर्माण हुआ। विद्यालय में शिशु मंदिर संचालित है, लेकिन विद्या मंदिर संचालित नहीं हो सका। विद्यालय के नाम करीब डेढ़ बीघा जमीन हैं। राष्ट्रपति की ओर से दी गई निधि की चर्चा आज भी कस्बा सहित क्षेत्र में हो रही है।
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तुम्हारे लिए सांसद ने हैंडपंप भेजा है
कानपुर देहात। भाजपा में पदाधिकारी और संघ से जुड़े लोगों के प्रति राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बेहद संजीदा रहे। हर समय उनका ध्यान रखना उनके स्वभाव में शामिल था। यह स्वभाव आज भी उनमें देखने को मिलता है। राज्यसभा सांसद रहते उन्होंने पार्टी के पदाधिकारियों के नाम एक-एक हैंडपंप करवाया था।
मंटुल सेंगर बताते हैं कि साल 2007 में कोविंद के प्रतिनिधि श्याम मोहन दुबे उनके पास आए और बताया कि सांसद ने उनके नाम एक हैंडपंप भेजा है। सूची में करीब पचास लोग शामिल थे। आज के दौर में एक नल के लिए पार्टी के ही पदाधिकारियों को दौड़ लगानी पड़ती है। (संवाद)
अपने लगाए हैंडपंपों को दुरुस्त करा रहे मो. शब्बीर
कानपुर देहात। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर जिला प्रशासन से लेकर रेलवे के अधिकारी एक पैर पर खड़े। आए दिन झींझक व रूरा रेलवे स्टेशन पर पहुंच कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहें, ताकि कोई चूक न हो सके। दूसरे तरफ झींझक के वाटरमैन कहे जाने वाले मोहम्मद शब्बीर भी अपने लगाए हैंडपंप, पेड़ आदि को दुरुस्त करने में जुटे हैं।
सही मायने में अगर समाजसेवा की मिशाल देखनी है तो झींझक के मोहम्मद शब्बीर से मिलिए। 2011 में उनकी बेटी खैरुन निशा का निधन हो गया था। गुल्लक में जुटाए रुपये को लोगों में सेवा करने के लिए शब्बीर ने तत्कालीन स्टेशन मास्टर बृजेश मीणा को पत्र लिखा। पत्र को रेलवे के अधिकारियों को भेजा गया। वहां से उन्हें सेवा की इजाजत दे दी गई। तब से लेकर आज तक वह झींझक से लेकर कानपुर सेंट्रल तक यात्रियों की मदद करते हैं। वह कानपुर सेंट्रल पर प्राइवेट पार्सल में काम करते हैं।
उससे मिलने वाली पगार का आधा हिस्सा रेलवे स्टेशन पर लगा देते हैं। वह अब तक झींझक स्टेशन पर 13 हैंडपंप लगवा चुके हैं। जबकि 35 से अधिक पौधे लगाए गए। जो अब यात्रियों को छांव दे रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने एक से लेकर चार नंबर प्लेट फार्म तक पांच सीमेंटेड सीट बनवाई। राष्ट्रपति के दौरे की जानकारी के बाद अधिकारी अपनी तैयारी में लग गए। वहीं मोहम्मद शब्बीर दूसरी तरफ अपने रुपयों से लगाई गई चीजों को दुरुस्त करने में जुटे हैं। इसकी चर्चा पूरे कस्बे में हो रही है।
लोगों ने की राष्ट्रपति से मिलाने की मांग
कानपुर देहात। झींझक कस्बा सहित आस-पास के लोग वाटरमैन मोहम्मद शब्बीर की समाजसेवा से वाकिफ हैं। गुरुवार को वह अपने लगाए हैंडपंप को दुरुस्त के अलावा अपने बेटे मोहम्मद सगीर से रंगरोगन करा रहे थे। कस्बे के ललानी अवस्थी, अंकित सिंह गौर, बंटी परिहार आदि का कहना है कि जिला प्रशासन को शब्बीर को राष्ट्रपति से मिलाना चाहिए। साथ ही उनके कामों से अवगत कराना चाहिए।
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