गुरसहायगंज (कन्नौज)। राजस्थान के बालाजी धाम से लौटे कस्बे के एक परिवार में बेटी की बीमारी परिवार के लिए हाहाकारी स्थितियों को जन्म दे गई। बुखार, गले में दर्द, उल्टी से पीड़ित युवती को कोरोना प्रभावित मानकर सीएचसी से सैफई पीजीआई का रास्ता दिखा दिया गया। सैफई में काफी देर एकांत में बैठाया गया। बाद में सामान्य बुखार बताकर घर ले जाने की सलाह दे दी। कोरोना के डर से एंबुलेंस वाले ने भी हाथ खींच लिए। नतीजे में निजी वाहनों से जूझते हुए परिवार ने बेटी के साथ सैफई से कन्नौज तक का सफर पूरा किया।
युवती के पिता का कहना है कि गुरसहायगंज सीएचसी हो या इटावा के सैफई का पीजीआई, दोनों जगह सबसे पहले ट्रेवल हिस्ट्री पूछी गई। राजस्थान से लौटने की बात सुनकर वहां तमाम इलाके के लोगों के बीच रहने की बात पर ठिठकते हुए डॉक्टरों ने जल्द रास्ता दिखाने की कोशिश शुरू कर दी। दोनों स्थानों में से किसी जगह उसकी जांच करने या नमूना लेने की कोशिश तक नहीं हुई। उनका कहना है कि शुक्रवार सुबह सीएमओ से मिलकर डॉक्टरों के ऐसे रवैये की शिकायत करेंगे।
गुरसहायगंज सीएचसी के डॉ. शशांक श्रीवास्तव ने बताया कि युवती के बालाजी धाम की यात्रा के दौरान तमाम तरह के लोगों के बीच रहने से संक्रमण का शक गहराया। गले में तकलीफ की बात सुनकर उसे बेहतर इलाज के लिए सैफई पीजीआई भेजना जरूरी लगा। सैफई इस क्षेत्र में ऐसे मामलों के लिए नोडल सेंटर है।
दूसरी ओर सैफई पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आलोक कुमार ने युवती के पिता के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि युवती को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था लेकिन घर वाले लेकर चले गए। डॉ. आलोक ने यह भी कहा कि अन्य समस्याओं के साथ युवती को पेट में दर्द और उल्टियां होनेे की शिकायत भी थी। कोरोना में पेट दर्द और उल्टियां नहीं होती हैं। यही बात घर वालों को स्पष्ट की थी।