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जानिए बैंक क्यों खारिज करते हैं लोन आवेदन, समझें बैंक की जरूरतें

Thu, 03 Oct 2019 12:57 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
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अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि बैंक ने उनका लोन आवेदन खारिज कर दिया। सवाल उठता है कि आखिर लोन के आवेदन बैंकों से खारिज क्यों होते हैं। चूंकि चार और पांच अक्तूबर को लोन मेला लगना है, इसलिए उससे पहले ये समझना जरूरी है। इसके लिए हमने लोन सेक्शन देखने वाले अफसरों से बात की और इसकी बारीकी समझी।
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बैंक अफसरों का कहना है कि मुद्रा जैसे लोन में यह शिकायत ज्यादा आती है। दरअसल, इस लोन में बैंक गारंटर अथवा किसी अन्य तरह की सिक्योरिटी नहीं लेते। इसमें सिर्फ दस्तावेजों की मजबूती देखी जाती है। दस्तावेजों की कमी तो आवेदन खारिज होने की एक वजह है ही, लेकिन यह भी आकलन किया जाता है कि आवेदक लोन की किस्त और उसका ब्याज चुकाने के लिए अपने व्यवसाय से इतना कमा पाएगा कि नहीं? यदि व्यवसाय नुकसान वाला अथवा कम आय देने वाला है तो भी लोन मिलना मुश्किल होता है। इसी तरह आवासीय लोन आय से ज्यादा रकम मांगने व प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की चेन न मिलने की वजह से खारिज होता है।
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तीन महीने में तैयार होती एनपीए रिपोर्ट 
अब लोन खाते एनपीए होने के लिए सीधे प्रबंधक को ही जिम्मेदार माना जाता है। हर तीन महीने में एनपीए की रिपोर्ट तैयार होती है। इसके अलावा वर्ष के अंत में स्टाफ एकाउंटेबिलिटी रिपोर्ट तैयार होती है। पुराने खातों से लोन की वापसी नहीं होने तक नए लोन देने से बैंक परहेज करते हैं।

सिबिल सबसे महत्वपूर्ण 
बैंक व्यक्ति के लेनदेन के इतिहास की पूरी जानकारी रखते हैं। इसके आधार पर सिबिल स्कोर तैयार होता है। सिबिल स्कोर तीन अंकों की एक संख्या है। इस पर आधारित एक रिपोर्ट बनती है जो सिबिल रिपोर्ट कहलाती है। इसमें क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट, उनके भुगतान का स्टेटस और उन्हें चुकाने में बचे दिन का सिलसिलेवार उल्लेख होता है। यह रिपोर्ट ही बताती है कि व्यक्ति लोन पाने का हकदार है या नहीं। लोन दिया जाए तो कितनी रकम तक। यदि पहले से चल रहे लोन की किस्तें अनियमित रही हैं तो भी लोन मिलना मुश्किल होता है। खाते में रुपये का नियमित लेनदेन नहीं है तो भी लोन मिलने में दिक्कत आती है।
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