कानपुर के मोतीझील स्थित लाजपत भवन में चार व पांच अक्तूबर को लगने वाले लोन मेला में किसी लोन की मौके पर ही स्वीकृति चाहिए तो पूरी तैयारी के साथ आएं। यानी जरूरी दस्तावेज पहले से ही जुटा लें। बैंक अफसरों से पूछे जाने वाले सवालों की सूची तैयार कर लें, ताकि एक काम के लिए बार-बार भटकना न पड़े। लोन मेला दोनों दिन सुबह 10 से शाम चार बजे तक चलेगा।
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लीड बैंक मैनेजर एके वर्मा का कहना है कि लोन लेने के इच्छुक लोगों को यह बात समझना जरूरी है कि बैंक सहानुभूति पर ऋण नहीं देते। बल्कि लोन हासिल करना प्रपत्रों की मजबूती, ऋण वापसी की गारंटी व जिस काम के लिए ऋण ले रहे हैं उसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
इस वजह से लोन के लिए आवेदन करने से पूर्व सभी प्रपत्र जुटा लें। कोई उद्योग या व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो पहले उसकी प्रकृति समझ लें। किसी सीए से प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनवाने से बेहतर है कि खुद यह रिपोर्ट तैयार करें। इससे व्यक्ति को कारोबार में होने वाले खर्चों की जानकारी रहती है।
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मुद्रा लोन के लिए ये प्रपत्र जरूरी (दो लाख तक के लोन पर) व्यक्ति की पहचान से संबंधित प्रमाण- वोटर कार्ड, आधार, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस निवास स्थान का प्रमाण- टेलीफोन बिल, बिजली बिल, वोटर कार्ड, आधार, हाउस टैक्स की रसीद जाति प्रमाण पत्र- अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक के लिए जरूरी व्यवसायिक स्थल का प्रमाण- फर्म का रजिस्ट्रेशन, दुकान का लाइसेंस, जीएसटी नंबर, अथवा किरायेदारी नामा
छह महीने का बैंक खाते से लेनदेन का विवरण
दो लाख से अधिक के लोन पर
- दो साल का आईटीआर, दो साल की बैलेंसशीट
- अगले एक वर्ष की प्रस्तावित बैलेंसशीट
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट
इनसे सीखें सबक, मुद्रा को बनाया हथियार
कानपुर। स्वरोजगार अपनाने के लिए शहर में हजारों लोगों ने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को हथियार बनाया है। आप भी नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो चार व पांच अक्तूबर को मोतीझील में लगने वाले लोन मेला में मुद्रा लोन से संबंधित जानकारी हासिल कर सकते हैं। प्रपत्र तैयार हैं तो मौके पर ही फार्म लेकर आवेदन भी कर सकते हैं। रावतपुर के अमित यादव व कैंट की निशा गुप्ता ने भी ऐसे ही सफलता हासिल की थी।
पांच लाख रुपये से दो माह पहले लगाई फैक्ट्री
रावतपुर गांव निवासी अमित यादव ने एमटेक (इलेक्ट्रॉनिक) की पढ़ाई पूरी करने के बाद मजे से मल्टी नेशनल कंपनी में नौकरी कर रहे थे। दो साल तक जॉब करने के बाद चार माह पहले उनमें स्वरोजगार की सोच पैदा हुई। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को हथियार बनाया। अपनी ही फील्ड से जुड़ा उद्योग लगाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया और मुद्रा लोन के लिए आवेदन किया। बैंक ऑफ इंडिया की कल्याणपुर शाखा को इनका प्रोजेक्ट पसंद आया। बैंक ने इन्हें पांच लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया। अमित ने दो माह पहले गड़रियनपुरवा में अपनी छोटी से फैक्ट्री खोली है। उसमें वे भवन निर्माण के समय इस्तेमाल होने वाले उपकरण जैसे फाइन बॉक्स, माड्यूलर व कंफील्ड आदि बनाते हैं। काम छोटा ही सही लेकिन अब वे इसके मालिक हैं।
मुद्रा बना मददगार, घर में शुरू किया पार्लर
शांतिनगर, कैंट निवासी निशा गुप्ता ने शादी के बाद घर पर ही कुछ काम करने की सोची। उन्होंने ब्यूटीपार्लर खोलने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की। बैंक ऑफ बड़ौदा की हरजेंदर नगर शाखा में आवेदन किया। कुछ रकम उन्होंने घर से लगाई और बाकी रकम उन्होंने मुद्रा योजना के तहत हासिल की। बैंक ने उनकी जरूरत के मुताबिक उन्हें 50,000 रुपये का शिशु लोन दिया। निशा करीब दो साल से अपने घर पर ही पार्लर चला रही हैं। निशा का कहना है कि हमेशा कम पूंजी से काम शुरू करना चाहिए। इससे लोन भी आसानी से मिल जाता है और नुकसान की गुंजाइश भी कम रहती है।