बच्चों ने ऐसे सिखाया क्यों बचाएं पानी
गुरुवार को कानपुर के स्कूली बच्चों ने सेव वॉटर का मतलब समझा। इस दौरान बच्चों ने सीखा कि पानी कैसे बचाएं। बचा हुआ पानी इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए। ये पानी पौधों में डालना चाहिए ताकि पौधों का भी जीवन बच सके, ऐसा करने से लोगों का जीवन सुखी हो जाएगा।
रतन चंद्र खत्री स्कूल गुजैनी में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को सेव वॉटर की शपथ दिलाई गई। इस दौरान बच्चों को बताया गया कि अगर जो बच्चा अपने घर की छत में या घर के बाहर प्याऊ लगायेगा। और पक्षी एवं जानवरों के साथ सेल्फी खींचकर दिखायेगा उसको परीक्षा में 5 नंबर एक्सट्रा दिए जाएंगे। टीचरों ने बच्चों को बताया कि गर्मी में पानी न मिलने की वजह से पक्षी और बेजुबान जानवर प्यास से बेहाल होकर मर जाते हैं। ऐसे में उनके लिए पानी की व्यवस्था जरूर करनी चाहिए। इसके अलावा लोगों को भी बताना चाहिए कि हमारे जीवन में पानी के साथ पशु और पक्षियों का क्या महत्व है।
घर में पानी बचाएं
1. पानी का प्रयोग न करते समय नल बंद रखें, दांत ब्रश करते समय नल खुला रखने से 15 लीटर पानी बेकार हो सकता है।
2. किसी तरह के रिसाव को ठीक कराएं: एक बूंद प्रति सेकेंड की दर पर टपकने वाले नलों से हर वर्ष 10,000 लीटर पानी व्यर्थ हो सकता है।
3. रिसाइकिल करें, फिर से इस्तेमाल करें। सब कुछ बनाने में पानी लगता है। खरीदारी जरूरत पड़ने पर ही करें और पुन: इस्तेमाल की जाने वाली चीज को फिर इस्तेमाल करें। एक सूती टी-शर्ट बनाने में 2500 लीटर पानी और एक जोड़ा जींस बनाने में 10,000 लीटर पानी लगता है। कम से कम कपड़े खरीदें और वाशिंग मशीन या डिशवाशर का इस्तेमाल करते समय पूरे लोड के लिए पर्याप्त कपड़े या बरतन जमा होने का इंतजार करें।
4. स्नान : बाथ टब – विकल्प। शावर – अच्छा विकल्प। बाल्टी – बेहतरीन विकल्प।
5. बागवानी: खासकर विकसित देशों में भूदृश्य बनाने और बागवानी करने में घरेलू जल उपयोग का एक बड़ा हिस्सा लगता है। इसके अलावा, बागवानी में इस्तेमाल किए गए जल का 50 फीसदी, भाप से उड़ने या जरूरत से ज्यादा पानी देने के कारण बरबाद हो जाता है। होज या स्प्रिंकलर की बजाय बूंद बूंद से होने वाली सिंचाई प्रणाली लगाएं।