कानपुर के चमनगंज स्थित हलीम कॉलेज में हो रही तरावीह में कुरान पाक का पाठ पूरा होने पर मुल्क और समाज में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ की गई। इस मौके पर उलेमा ने कहा कि तरावीह की नमाज रमजान का चांद देखकर शुरू होती है और इसे ईद का चांद देखकर खत्म करना चाहिए।
लोग छह और 10 दिन तरावीह पढ़ते हैं, फिर छोड़ देते हैं। यह गलत है। दिन में रोजा इबादत और रात में तरावीह। हलीम कॉलेज में हो रही तरावीह में हाफिज मो. आमिर अजहरी ने कुरान पाक मुकम्मल किया।
खास
रमजान के महीने में पैगंबर-ए-इस्लाम के नवासे और चौथे खलीफा हजरत अली के बड़े बेटे हजरत इमाम हसन का जन्म हुआ था। इस्लामी इतिहास में उनका जन्म दिवस 15 रमजान को बताया गया है। इसी महीने में पैगंबर हजरत दाऊद अलैहस्सलाम को जबूर मिली। जबूर को आसमानी किताब यानी ईश्वरीय शब्द माना जाता है।