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किडनी कांड मामले में सामने आया सबसे बड़ा सच, एनसीआर ब्लड डोनेशन घोटाले से जुड़े हैं तार

Tue, 26 Feb 2019 11:17 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर में किडनी कांड में एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं। एनसीआर में हुए ब्लड डोनेशन घोटाले से भी किडनी कांड के तार जुड़ रहे हैं। कई आरोपी ऐसे हैं जो दोनों कांड में शामिल रहे हैं। एसआईटी ने इसकी जांच शुरू कर दी है।
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मई 2018 में नोएडा पुलिस ने ब्लड डोनेशन घोटाले का खुलासा किया था, जिसमें पता चला था कि निजी एनजीओ मरीजों को मुफ्त में खून उपलब्ध करवाने का दावा कर जगह-जगह कैंप लगाकर ब्लड डोनेशन करवाते थे। बाद में इसे अवैध तरीके से बेचा जाता था। यह घोटाला करीब चार करोड़ रुपए का था। यह घोटाला 2014 से 2017 के बीच हुआ था। एसपी साउथ रवीना त्यागी के मुताबिक किडनी कांड में चार से पांच नाम ऐसे हैं जो उस घोटाले में भी शामिल थे। एक दो नाम घोटाला करने वाले निजी एनजीओ के भी हैं। इसलिए अब नोएडा पुलिस से इस संबंध में जानकारी ली जा रही है। जल्द ही इन लोगों की तलाश कर पुलिस कार्रवाई करेगी।
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कानपुर में बेचा गया था सात हजार यूनिट ब्लड 
एसपी के मुताबिक घोटाले की जांच में पता चला था कि कानपुर के एक ब्लड बैंक को एनजीओ ने सीधे ब्लड सप्लाई किया था। सात हजार से अधिक यूनिट ब्लड कानपुर में बेचा गया था। इसके लिए मोटी रकम वसूली गई थी।

डोनरों का रखा जाता था बैकअप
किडनी कांड में टी राजकुमार के बाद आरोपी गौरव मिश्रा की मुख्य भूमिका था। वही राजकुमार से पूरी सेटिंग कर यहां से डोनर दिल्ली भेजता था। एसपी साउथ के मुताबिक जांच में एक और खुलासा हुआ है। इसमें पता चला है कि गौरव ने लखनऊ और कानपुर में कुछ कमरे किराए पर ले रखे थे। यहां पर फ्री रहने की सुविधा मुहैया करवाकर गरीब, मजदूर और रिक्शेवालों को रखता था। कुछ समय बाद वह एक-एक कर इन लोगों को रैकेट में शामिल करता था और पैसों का लालच देकर किडनी डोनेट करने केलिए प्रेरित करता था। वह एक समय में पांच से दस डोनर तैयार रखता था। जब दिल्ली से राजकुमार डोनर की मांग करता था तो वह इन्हीं में से भेज देता था। 
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