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किडनी कांडः लाखों रुपये खर्च कर खरीदी ‘मौत’, सामने आए कई चौकाने वाले तथ्य

Sun, 03 Mar 2019 09:46 AM IST
प्रशांत कुमार वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर
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धोखाधड़ी की, फर्जीवाड़ा किया और लाखों रुपये भी खर्च किए फिर भी जिंदगी की कोई गारंटी नहीं। किडनी व लिवर ट्रांसप्लांट के काले कारोबार का यही सच है। कुल मिलाकर रिसीवर लाखों रुपये खर्च करके ‘मौत’ खरीदते थे। एसआईटी की जांच में फिलहाल ऐसे दो मामले सामने आएं हैं, जिनमें ट्रांसप्लांट फेल रहा। लाखों खर्च करने के बावजूद रिसीवरों की जान नहीं बच पाई। वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि किडनी या लिवर ट्रांसप्लांट के लिए कराई जाने वाली जांचें डोनर और रिसीवर से मैच करनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर दिक्कत होती है।
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एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ है कि लखनऊ के डोनर रईस ने लखीमपुर खीरी के कारोबारी कमल सक्सेना को वर्ष 2018 में अपना लीवर बेचा था। ट्रांसप्लांट के कुछ ही दिन बाद कमल की मौत हो गई थी। वहीं डोनर वरदान ने जिसको अपनी किडनी बेची थी, उसकी भी मौत हो गई थी। अन्य कई रिसीवर भी संक्रमण से जूझ रहे हैं।
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अस्पताल में सुविधा नहीं, फिर भी हो गया ट्रांसप्लांट 

लखनऊ के रईस मोहम्मद ने लखनऊ के एक अधिकारी कमल सिंह चौहान को लिवर बेचा था। ट्रांसप्लांट लखनऊ के रायबरेली रोड स्थित एक अस्पताल में हुआ था। एसआईटी ने खुलासा किया है कि अस्पताल में सुविधाएं नहीं होने के बावजूद अवैध रूप से ट्रांसप्लांट किया गया है। हालांकि कि नाम का खुलासा नहीं किया। सूत्रों की अनुसार पुलिस अस्पताल की डॉक्टर नूतन को सफीना नोटिस देने की तैयारी में है।


किडनी या लिवर ट्रांसप्लांट के लिए रिसीवर और डोनर के डीएनए, ब्लड ग्रुप से लेकर एसएलए, टिश्यू मैचिंग तक कई टेस्ट कराए जाते हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ट्रांसप्लांट किया जाता है। अगर टेस्ट में डोनर और रिसीवर की कोई भी जांच रिपोर्ट मैच नहीं करती है और ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है तो शरीर किडनी रिजेक्ट कर देता है। ऐसे में रिसीवर की मृत्यु की संभावना अधिक हो जाती है। -डॉ. निर्भय गुर्जर, नेफ्रोलॉजिस्ट रिजेंसी हॉस्पिटल

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