इस मशीन से देशभर के संस्थानों को भी रिसर्च करने का मिलेगा। इससे नई दवाएं खोजने में मदद मिलेगी और उसकी कीमत कम होगी। प्रो. शुक्ला ने बताया कि यह माइक्रोस्कोप करीब 10 टन का है। फिलहाल मशीन को खोला नहीं गया है, इसे स्थापित करने में एक महीने से अधिक का समय लगेगा।
इस मशीन की सहायता से बनेंगी सटीक दवाएं
साइड इफेक्ट के बारे में सटीक जानकारी देने वाला क्रायो इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप को साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड की मदद से मंगाया गया है। अक्सर किडनी, लिवर, फेफड़े, दिल में समस्या होने पर प्रोटीन की दिशा गड़बड़ा जाती है। मतलब हो सकता है दिल की दवा से निकलने वाला प्रोटीन दूसरे अंगों के लिए घातक हो।
इस माइक्रोस्कोप की मदद से प्रोटीन की दशा पता चल सकेगी। इसकी रिपोर्ट के आधार पर रसायनिक परिवर्तन कराने से सटीक दवाएं बनाई जा सकेंगी। इसमें -180 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रखने की सुविधा है। इस माइक्रोस्कोप की मदद से प्रोटीन की सिग्नलिंग कराई जा सकेगी।