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KGMU Suicide: छलांग लगाने से पहले छात्रा ने की थी मां से बात, बोलीं- मजबूत इच्छाशक्ति वाली थी…नहीं था कोई तनाव

Wed, 15 Jan 2025 11:47 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: केजीएमयू में डॉ. प्रकृति के सुसाइड के प्रयास के मामले में छात्रा ने छलांग लगाने से पहले मां से बात की थी। परिजनों का कहना है कि प्रकृति मजबूत इच्छा शक्ति वाली है, कोई तनाव नहीं था। 
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केजीएमयू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्रावास के चौथी मंजिल से छलांग लगाने वाली जूनियर रेजिडेंट प्रकृति वासवानी के परिजनों का कहना है कि उन्हें किसी तरह का कोई तनाव नहीं था। वह सात दिन पहले ही घर से विश्वविद्यालय गईं थी। उनकी ड्यूटी जरूर लंबी हो रही थी, लेकिन व्हाट्सएप कालिंग और मैसेज कर अपने हालचाल बता दिया करती थी।

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सोमवार की रात को भी उन्होंने मां मनीषा वासवानी से बातचीत की। परिजन का कहना है कि डॉ. प्रकृति मजबूत इच्छाशक्ति वाली हैं। अपनी बात बेबाकी से कहती हैं। प्रकृति के चाचा विनोद वासवानी ने बताया कि वह मेडिसिन से ही पीजी करना चाहतीं थी। नीट पीजी में उनको केजीएमयू में ही सीट मिल गई, जिस पर उन्होंने खुशी खुशी वहां ज्वाइन कर लिया था।

प्लास्टिक पैकेजिंग के व्यवसायी हैं पिता
प्रकृति ने एमबीबीएस भी केजीएमयू से ही किया है। मंगलवार की सुबह उनके माता-पिता के पास मेडिसिन विभाग की हेड डॉ. अनीता का कॉल आया, जिस पर वह लोग निकल गए। पिता अशोक वासवानी प्लास्टिक पैकेजिंग के व्यवसायी हैं, जबकि छोटा भाई वैभव बेंगलुरु से बीटेक कर रहा है। बहन के सुसाइड के प्रयास की सूचना के बाद वह भी लखनऊ के लिए निकल गए हैं।

अधिकतर टॉपर आई क्यू में अच्छे, लेकिन ईक्यू रह जाता है कम
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. सीमा नाहिद ने बताया कि, सुसाइड करने के कई कारण हो सकते हैं, उनमें से एक डिप्रेशन भी है। अब डिप्रेशन के पीछे कई वजह होती हैं, लेकिन टॉपर बच्चों में एक कारण ये भी होता है कि उनका आई क्यू तो अधिक होता है लेकिन ई क्यू ( इमोशनल कोशेंट) काफी कम होता है। ऐसा सभी में, तो नहीं लेकिन अधिकतर में देखा जाता हैं।

ये सब कहना बंद करना पड़ेगा
उनका कहना है कि बच्चों पर पढ़ाई का बोझ न डालें। तुम्हारी परीक्षा है तुम शादी में न जाओ। पहले पढ़ लो फिर घूमने जाना। ये सब कहना अब बंद करना होगा। इससे बच्चे सामाजिक नहीं रह पाते। और जब उन्हें आगे चलकर परेशानी हो जाती तो वे किसी से कह नहीं पाते हैं क्योंकि उन्हें तब तक अकेले रहते रहते ये एहसास हो चुका होता है कि न तो उन्हें किसी से मतलब और न ही उनकी किसी को फिक्र है।
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इन बातों का रखें ध्यान

  • पढ़ाई 45 मिनट से एक घंटे के बीच करें और 5 से 15 मिनट का ब्रेक लें।
  • ब्रेक के दौरान कुछ शारीरिक गतिविधि करें।
  • विटामिन डी, बी 12 और हीमोग्लोबिन की जांच कराएं।
  • घर में तनाव भरी बातें न करें।
  • रासायनिक असंतुलन से बच्चों में याहू वाली स्थिति हो रही कम।
  • ईक्यू बढ़ाया जा सकता है, बच्चों से बात करके।
  • एहसास दिलाएं कि वो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • उन्हें अपने साथ सामाजिक कार्यक्रमों में भी ले जाएं, जिससे वे लोगों से घुले मिले।
  • दिन में एक घंटे उनके लिए आउटडोर गेम भी रखें।
  • लगातार घंटों तक एक बंद कमरे में पढ़ने वाले कल्चर को बदलना होगा।
  • बीच बीच में ब्रेक लें और उसमें मोबाइल या लैपटॉप से दूर रहें।
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