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कसेगा शिकंजा: केस्को मास्टर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट से कर सकेगा मीटरों की जांच, एमआरआई से पकड़ में आएगी बिजली चोरी

Sat, 17 Feb 2024 09:56 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: एमआरआई एक तरह से स्पॉट बिलिंग मशीन की तरह रहता है। इसकी मदद से व्यवसायिक उपभोग वाले मीटर का बिल बनाने वाले कर्मचारी मीटर का डाटा लेकर जाएंगे और उन्हें कार्यालय के सॉफ्टवेयर में डालेंगे। सॉफ्टवेयर में घर का लोड, बिजली की खपत और उपभोग की पूरी डिटेल सामने आ जाएगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में बिजली चोरों पर नकेल कसने के लिए केस्को ने नई कवायद शुरू कूी है। अब ऐसे लोगों को मास्टर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट (एमआरआई) से पकड़ा जा सकेगा, इनसे जुर्माना भी वसूला जाएगा। केस्को कर्मी एमआरआई की मदद से मीटर की जांच करेंगे, तो उसका डाटा विभाग के कंप्यूटर में आ जाएगा।

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उपभोक्ता ने कितनी यूनिट इस्तेमाल की है और उनके यहां कितना लोड है, इसकी सटीक जानकारी मिल जाएगी। बिजली चोरी होने पर उपकरण सब कुछ बता देगा। अभी एमआरआई को पांच किलोवॉट से अधिक के मीटरों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। बाद में इससे कम क्षमता वाले मीटरों की जांच के लिए उपयोग किया जा सकता है।
केस्को के अधिकारी बिजली चोरी के मामलों पर नकेल कसने की तैयारी में हैं। पूर्व में क्षेत्र के लोड की वास्तविक जानकारी के लिए ट्रांसफार्मरों में स्मार्ट मीटर लगाया गया था। ऐसे में केस्को कर्मियों ने बिजली चोरी की संभावना पर कई घरों में छापा मार कार्रवाई की। अब एक पोल के सहारे कई घरों में गए केबल और उससे जुड़े मीटर के लोड की जांच के लिए अलग से पोल में स्मार्ट मीटर लगाने की भी तैयारी है।

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मोहल्लों में लगने शुरू हो गए हैं स्मार्ट पोल मीटर
कुछ मोहल्लों में स्मार्ट पोल मीटर लगने शुरू हो गए हैं। यह मीटर घरों के वास्तविक लोड का औसतन आकलन कर सकेंगे, जिससे लोड की जानकारी मिल जाएगी। व्यवसायिक उपभोग वाले मीटर (पांच किलोवॉट से अधिक) की जांच के लिए एमआरआई सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।

ऐसे पकड़ी जाएगी गड़बड़ी
केस्को के मीडिया प्रभारी श्रीकांत रंगीला के मुताबिक एमआरआई एक तरह से स्पॉट बिलिंग मशीन की तरह रहता है। इसकी मदद से व्यवसायिक उपभोग वाले मीटर का बिल बनाने वाले कर्मचारी मीटर का डाटा लेकर जाएंगे और उन्हें कार्यालय के सॉफ्टवेयर में डालेंगे। सॉफ्टवेयर में घर का लोड, बिजली की खपत और उपभोग की पूरी डिटेल सामने आ जाएगी।

पता चल सकेगा कि कितने समय के लिए मीटर बंद हुआ
अगर किसी तरह की गड़बड़ी हुई, तो इसकी सही सूचना मिल जाएगी। इसमें पता चल जाएगा की कितनी देर तक सप्लाई आई और कितने समय के लिए मीटर बंद हुआ। किसी उपभोक्ता के यहां तीन फेस में करंट आ रहा है और उनके यहां जीरो वोल्टेज है, तो भी इसकी जानकारी मिल जाएगी।
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बड़े उद्योगों या 25 किलोवॉट से अधिक भार क्षमता वाले मीटरों के लिए एमआरआई आधारित मीटरिंग का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब पांच किलोवॉट वाले मीटरों के लिए भी एमआरआई का उपयोग किया जाएगा।  -सैमुअल पॉल एन, केस्को एमडी
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