फोन पर कहा- आपका नाम मनी लॉड्रिंग में आया है
उसने झांसे में लेने के लिए उसी लाइन पर पुलिस को कॉल ट्रांसफर कर दिया और विक्रम नाम के युवक ने खुद को दरोगा बता कहा कि रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और एफआईआर नंबर भी दिया। फिर फोन सीबीआई अधिकारी के नाम पर पायल ठाकुर के पास ट्रांसफर किया। पायल ने फोन पर कहा कि आपका नाम मनी लॉड्रिंग में आया है। ऐसे में खातों की जांच करनी होगी। आपको अपने खाते में जमा सारे रुपये ट्रांसफर करने होंगे। पायल ने आश्वासन दिया कि जांच पूरी हने के बाद उनके रुपये वापस कर दिए जाएंगे।
रुपये मिलने के बाद ठगों ने अपना मोबाइल बंद कर दिया
कहा कि केस खत्म होने तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा जाएगा और केस खत्म होने पर बेल हो जाएगी। पीड़ित ने तीन बार में आरटीजीएस के जरिये 82 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए। उन्हें 24 मार्च तक डिजिटल अरेस्ट रखा। रुपये मिलने के बाद ठगों ने अपना मोबाइल बंद कर दिया। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ। साइबर थाना प्रभारी सुनील वर्मा ने बताया कि पीड़ित ने मामले में तहरीर दी है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस तरह ठगों ने निकलवाए पैसे
- विनोद ने बताया कि ठगों ने जांच का हवाला देकर अकाउंट में जमा रिटायमेंट का पैसा 25 फरवरी 2025 को 49 लाख 50 हजार रुपये का आरटीजीएस अपने खाते में कराया।
- अकाउंट खाली होने पर ठगों ने पूछा कि आपके पास पॉलिसी के नाम पर क्या है, तो इन्होंने अपनी और पत्नी की एलआईसी पॉलिसी की जानकारी दी। इस पर ठगों ने मैच्योर हुए बगैर तुड़वा दी और इसका 26 लाख रुपये 15 मार्च को अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया। इसके बाद ठगों ने सीबीआई अफसर बनकर घर के जेवरों के बारे में जानकारी जुटाई। जेवरात को बैंक में बंधक बनवाकर 6.80 लाख रुपये का लोन कराया और इसकी रकम भी 24 मार्च को अपने खाते में ट्रांसफर कराई।
- इसके बाद ठगों ने प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दी। ठगों ने फ्लैट के दस्तावेज मंगाए और उसपर 50 लाख रुपये का लोन कराने की तैयारी में थे।
भतीजे को मिली जानकारी, तो ठगी का पता चला
दो अप्रैल को विनोद झा ने पीएफ कार्यालय और मुंबई में एसबीआई में तैनात भतीजे को इसकी जानकारी दी। मुंबई में बैठे भतीजे ने जब उनका अकाउंट चेक किया पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़िता का कहना था कि अगर समय रहते जानकारी नहीं होती, तो उनका फ्लैट भी चला जाता। जीवन भर की कमाई जाने की साथ ही रहने का भी ठिकाना नहीं बचता।
ठगों की वर्दी, ऑफिस और सीबीआई को लोगो देखकर दहशत में आए
विनोद झा ने बताया कि शातिर ठग व्हाट्सएप ऑडियो और वीडियो कॉल पर बात करते थे। वर्दी में रहते थे, उनकी कुर्सी के पीछे दीवार पर सीबीआई का लोगो लगा था। मेज पर फाइलों के गट्ठर और पुलिस अफसरों की आवाजाही देखकर उन्हें लगा कि यह सच में दिल्ली सीबीआई का दफ्तर है। इंट्रोगेशन करने का तरीका और उन्हें विभागों से जुड़ी तमाम जानकारी और आईटी व सीबीआई की जांच वाले लेटर भेजकर इस तरह से ब्रेनवॉश कर दिया कि उन्हें कुछ समझ ही नहीं आया।
शिकायत के बाद भी ठगों की आती रही कॉल
पीड़ित ने बताया कि उन्होंने पनकी थाना और साइबर थाने में मामले की शिकायत की। इसके बाद भी ठग अफसर बनकर लगातार उन्हें कॉल कर रहे थे। वह कह रहे थे कि जल्द ही आपकी जांच पूरी होने वाली है। बस प्रॉपर्टी के पेपर और इससे जुड़ी जांच बाकी है।
पीएफ ऑफिस की विजिलेंस टीम में भी थे विनोद
पनकी हिमालय भवन अपार्टमेंट में रहने वाले विनोद कुमार झा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सर्वोदयनगर में एसएसएसए के पद पर कार्यरत थे। पीएफ ऑफिस की विजिलेंस टीम में भी लंबे समय तक काम किया है। घर में पत्नी रेनू झा साथ में रहती हैं। बड़ा बेटा हेमंत झा बैंक कर्मचारी है, जो आजादनगर में पत्नी, बच्चों के साथ रहते हैं। दूसरा बेटा अवनीश झा सूरत में परिवार के साथ रहकर प्राइवेट जॉब करता है। गीतानगर क्रॉसिंग के पास रामलीला मैदान के सामने रहने वाले भतीजे पीएफ ऑफिस कर्मचारी राजीव झा दंपती की देखरेख करते हैं। ठगी की जानकारी मिलने के बाद वह भतीजे के घर में हैं।