कानपुर। केडीए रूमा के पास उचटी गांव में काश्तकारों से अनुबंध कर अटलनगर आवासीय कालोनी विकसित करेगा। बिल्डर कंपनियों के रुचि न दिखाने पर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने विभागीय स्तर पर इसे विकसित करने का फैसला लिया है। शहर में पीपीपी मॉडल पर विकसित की जाने वाली योजना के प्रस्ताव के अनुसार काश्तकारों से जितनी कृषि योग्य जमीन ली जाएगी, उस पर विकसित 25 प्रतिशत प्लाट उन्हें दिए जाएंगे, जिन्हें वे बेच भी सकेंगे। शेष जमीन के प्लाट केडीए बेचेगा।
विकास प्राधिकरण ने अहिरवां एयरपोर्ट, कानपुर-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग और आउटर रिंग रोड के पास स्थित ग्राम उचटी की करीब 300 एकड़ जमीन पर अटलनगर योजना विकसित करने का खाका खींचा है। करीब 100 एकड़ ग्राम समाज, ऊसर, बंजर, चारागाह आदि की जमीन पर केडीए का स्वामित्व है। शेष जमीन काश्तकारों से ली जानी है। वहां से डिफेंस कॉरिडोर की भी कनेक्टिविटी होगी। अटलनगर योजना में हजारों लोगों का आशियाने का सपना पूरा होगा।
ढाई महीने पहले केडीए बोर्ड की बैठक में इस योजना को निजी बिल्डर कंपनी के माध्यम से पीपीपी मॉडल पर विकसित करने के लिए मंजूरी दी गई थी। इसके बाद केडीए ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया। चयनित बिल्डर या फर्म को काश्तकारों से त्रिस्तरीय वार्ता कर उन्हें इस योजना के लिए जमीन बेचने या जमीन के बदले 25 प्रतिशत विकसित प्लाट लेने के लिए राजी करना था।
कार्य के लिए पहली बार में कोई कंपनी आगे नहीं आई। दूसरी बार में एक बिल्डर ने रुचि दिखाई। कंपनी चाहती थी कि एक साथ पूरी योजना विकसित करने के बजाय 100-100 एकड़ में फेजवार विकसित की जाए। ऐसा करने पर केडीए की लागत ज्यादा आती और बाद में शेष जमीन खरीदने में दिक्कत हो सकती थी। सामंजस्य न होने के कारण इस कंपनी से भी बात नहीं बन पाई। केडीए उपाध्यक्ष मदन सिंह गर्ब्याल ने बताया कि अब केडीए अपने स्तर से ही काश्तकारों से बात कर पीपीपी मॉडल पर अटलनगर योजना विकसित करेगा। इस योजना के लिए जमीन देने के लिए वहां से कई काश्तकार सहमत हो गए हैं। जल्द ही काश्तकारों के साथ बैठ कर आगामी रूपरेखा तैयार की जाएगी।