...तो चिड़ियाघर के जानवरों की जान लेकर ही दम लेगा केडीए
Thu, 16 Mar 2017 05:17 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
सार
-चिड़ियाघर के पास बन रही सिग्नेचर सिटी के निर्माण का पशुओं पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
-अत्यधिक धूल और ध्वनि प्रदूषण से चिड़ियाघर के अन्य पशु पक्षी भी हो रहे बीमार
चिड़ियाघर के पास केडीए की निर्माणाधीन सिग्नेचर सिटी लाख दावों के बावजूद चिड़ियाघर के पशु पक्षियों के लिए बवाले-ए-जान बनी हुई है। यहां के अधिकतर पशु पक्षियों की दिनचर्या बिगड़ चुकी है। अब इसका दुष्परिणाम देखने को मिल रहा है। पशु पक्षी जल्दी जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। इससे चिड़ियाघर प्रशासन काफी परेशान भी है।
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यहां के चिकित्सकों के अनुसार केडीए के लाख आश्वासनों के बावजूद सिग्नेचर सिटी का निर्माण देर रात तक जारी रहता है। वहीं, धूल रोकने के लिए निर्माणाधीन भवन पर लगाए गए पर्दे भी बेअसर साबित हो रहे हैं। इससे पशु पक्षियों की दिनचर्या का पूरा सर्किल ध्वस्त हो चुका है और अब वे इसके चलते बीमार पड़ रहे हैं।
सो नहीं पा रहे जानवर
चिड़ियाघर के अधिकतर पशु पक्षी दिन के समय जागने को मजबूर होते हैं। दिन में पर्यटकों के चिड़ियाघर में घूमने के चलते उनकी नींद में खलल भी पड़ती है। ऐसे में उन्हें रात का ही सहारा होता है। पर जब से चिड़ियाघर के बगल में सिग्नेचर सिटी बननी शुरू हुई है, तब से रात के वक्त भी मशीनों की आवाजों ने पशु पक्षियों को लगातार जागने पर विवश कर दिया है। हालांकि केडीए दावा करता है कि रात में काम बंद रहता है और धूल के कण चिड़ियाघर में न जाएं, इसके लिए पर्दा आदि की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद मौके पर पर्दा आदि केवल कोरम पूरा करते दिखाई देते हैं। रात में मशीनों की आवाज और तेज लाइटों की चकाचौध से चिड़ियाघर के पशु पक्षी नहीं सो पाते।
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क्या है मामला-
गौरतलब है कि चिड़ियाघर के बगल में बन रही केडीए की सिग्नेचर सिटी (जो पूर्व मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट था) चिड़ियाघर के पशु पक्षियों के लिए बवाल-ए-जान बनी हुई है। इस निर्माण कार्य से लगातार धूल के कणों का चिड़ियाघर में फैलना, मशीनों की अत्यधिक आवाज और रात के समय भी तेज रोशनी की लाइटों के जलने से यहां के पशु पक्षियों की दिनचर्या पूरी तरह बिगड़ गई। खासकर पक्षियों के प्रजनन का सर्किल भी बिगड़ गया। उधर, हाल के महीनों में एक-एक कर कुछ पशुओं के मरने की घटना ने चिड़ियाघर प्रशासन के कान खड़े कर दिए। चिड़ियाघर अधिकारियों की चिंता तब और बढ़ गई जब मृत सभी पशु पक्षियों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी के फेफड़ों में धूल और कार्बन के कण पाए गए। इसके बाद से चिड़ियाघर प्रशासन ने शासन से निर्माण को रुकवाने या वैकल्पिक उपाय कराने की भी कई बार अपील की है।
कानपुर चिड़ियाघर के वन्य जीव चिकित्सक यूसी श्रीवास्तव लगातार शोर और वायु प्रदूषण के चलते जानवरों को स्लीप एक्निया की परेशानी पेश आ रही है। वे सो नहीं पा रहे हैं। इससे वे बेचैन रहते हैं। उनके खान पान पर भी इसका असर हुआ है। इस स्थिति का उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। वे जल्दी जल्दी बीमार पड़ रहे हैं।