पनकी गंगागंज के 700 से ज्यादा काश्तकारों की 900 बीघा भूमि का मुआवजा नए दर से नहीं दिया जा रहा है। इस भूमि के अधिग्रहण को 45 साल हो चुके हैं। हाईकोर्ट का आदेश और शासनादेश भी काश्तकारों के पक्ष में है।
बावजूद इसके केडीए हर काश्तकार से अपने-अपने पक्ष में हाईकोर्ट के फैसले की मांग कर रहा है। काश्तकार और उनके आश्रित भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। एक काश्तकार ऐसे हैं, जिनकी 104 बीघा भूमि का अधिग्रहण हुआ है।
इस परिवार में एक व्यक्ति को कैंसर है लेकिन इलाज के लिए पैसा नहीं है। इस परिवार ने तमाम बार गुहार लगाई लेकिन केडीए ने कोई सुनवाई नहीं की। काश्तकार कह रहे हैं या तो केडीए उनको उनका हक दे या फिर चक (खेत) वापस करे।
केडीए ने पनकी गंगागंज की भूमि 1968 में अधिगृहीत की थी। ओम प्रकाश मिश्रा की 20 बीघा, शिव प्रसाद तिवारी की 21 बीघा, रमाकांत मिश्रा की 20 बीघा, पंचमुखी हनुमान मंदिर की 60 बीघा और एक काश्तकार की 104 बीघा भूमि अधिगृहीत की गई थी।
इनको नए दर से मुआवजा नहीं दिया गया। काश्तकार प्रति बीघा 21.46 लाख रुपये का मुआवजा मांग रहे हैं, जो हाईकोर्ट के आदेश के बाद केडीए ने तय किया है। तमाम काश्तकारों को मुआवजा भी दिया है। इसके बावजूद 700 से ज्यादा काश्तकारों का मामला लटकाए रखा गया है।
काश्तकार रमाकांत का कहना है कि जो गरीब हैं वो नए दर से मुआवजा पाने में नाकाम हैं। जिन लोगों ने पैरवी की और पैसा खर्च किया, उन सभी को 21.46 लाख रुपये प्रति बीघा दर से मुआवजा मिल गया है। केडीए ने काश्तकारों के साथ नाइंसाफी की है।
जो भूमि किसानों से उस समय 1200, 1600 और 1800 रुपये प्रति बीघा खरीदी गई थी, उसे आज तीन करोड़ रुपये प्रति बीघा की दर से बेच रहा है। अब इस मामले में कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
शासन का नियम है कि जो परियोजना लांच हो, उसका विकास पांच साल के अंदर होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो महंगे दर पर भूमि बेचने का अधिकार प्राधिकरण को नहीं है।
काश्तकारों ने यह भी मांग की है कि यदि केडीए नए दर से मुआवजा नहीं देता है तो उनकी भूमि वापस कर दे। अब भूमि अधिग्रहण का नया कानून लागू हो गया है। पनकी गंगागंज में प्रति बीघा भूमि का मुआवजा अब 1.38 करोड़ रुपये मिलेगा।
अब तीन करोड़ रुपये प्रति बीघा बेच रहे भूमि
पनकी गंगागंज का वर्तमान डीएम सर्किल रेट 45 लाख से 69 लाख रुपये प्रति बीघा है लेकिन स्कूल, पार्क, मॉल, हास्पिटल सहित तमाम विकास और कंस्ट्रक्शन, एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज लगाकर केडीए यही जमीन 15-18 हजार रुपये प्रति स्क्वायर मीटर बेच रहा है।
इस हिसाब से केडीए प्रति बीघा जमीन 3 करोड़ रुपये में बेच रहा है। वास्तविकता यह है कि पनकी गंगागंज का पूरा विकास नहीं हुआ है। फिर भी डेवलपमेंट चार्ज लिया जा रहा है।
केडीए के लिए फायदे का सौदा
केडीए की 12 आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाएं विवादित हैं। पनकी गंगागंज ऐसी परियोजना है, जिसके सहारे केडीए 10 साल तक अपने कामकाज को आगे बढ़ा सकता है। इस प्रोजेक्ट से 50 अरब से ज्यादा का मुनाफा भी कमा सकता है।
केडीए ने यहां की 730 बीघा भूमि के लिए एक अरब 75 करोड़ रुपये भूमि अध्याप्ति विभाग को दिए हैं। इसके विपरीत 150 बीघा भूमि का रजिस्ट्रेशन खोलकर तीन अरब से ज्यादा रुपया जमा करा लिया है। हर व्यक्ति से 65000 रुपये जमा कराए गए हैं। भूमि आवंटन के दौरान और पैसा मिलेगा।
बोले जिम्मेदार
हाईकोर्ट के आदेश पर प्रति बीघा मुआवजा 21.46 लाख रुपये तय किया गया है। जो किसान हाईकोर्ट गए थे, उन्हीं को नए दर का मुआवजा मिला है। इसपर भी आडिट आब्जेक्शन आ गया है। इस मामले में केडीए अपनी तरफ से कुछ भी नहीं कर सकता है।
जो काश्तकार हाईकोर्ट से आदेश लाएंगे, उन्हीं को बढ़ी दर का मुआवजा दिया जाएगा। केडीए ने 1968 में भूमि अधिगृहीत की थी। तब जो मुआवजा तय हुआ था, उसे दिया गया था। अब क्षेत्र का विकास किया गया है।
इसलिए प्रति बीघा भूमि की बिक्री रेट बढ़ाकर की जा रही है। जिस काश्तकार को पुराने मुआवजे पर आपत्ति है, वह कोर्ट जा सकते हैं। काश्तकारों की समस्या को लेकर केडीए गंभीर है लेकिन मामले का निराकरण सिर्फ केडीए से संभव नहीं है। तमाम काश्तकार आते भी हैं। उनकी समस्या सुनी और निराकरण का तरीका बताया जाता है।
-जयश्री भोज, उपाध्यक्ष केडीए
इस मामले का अध्ययन कराया जाएगा। यदि संभव होगा तो काश्तकारों की मदद की जाएगी। शासनादेश और हाईकोर्ट के आदेश के हिसाब से कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
-मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन, कमिश्नर कानपुर मंडल