इस बार 30 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग और वर्धमान योग पड़ रहा है। यह संयोग अत्यंत ही शुभ है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। चंद्रोदय के वक्त चंद्रमा की छह कृतिकाओं के पूजन से शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है। इस दिन गंगा स्नान करने से वर्ष भर के गंगा स्नान का फल मिलता है।
पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि 30 नवंबर को रोहिणी नक्षत्र के साथ सर्वसिद्धि योग एवं वर्धमान योग का संयोग होने से पूर्णिमा का शुभ योग बन रहा है। इसी दिन सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव महाराज का 551वां जन्मदिवस भी है। पूर्णिमा तिथि 29 नवंबर को दोपहर 12:47 बजे से शुरू होगी और 30 नवंबर को दोपहर 2:59 बजे तक रहेगी।
पूर्णिमा से ही कार्तिक माह के स्नान का समापन भी होगा। आचार्य पवन तिवारी ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान विष्णु चतुर्मास के बाद जागृत अवस्था में होते हैं। भगवान विष्णु ने इसी तिथि पर मत्स्य अवतार लिया था। कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी के पास तथा तालाब या सरोवर में दीपदान से मां लक्ष्मी प्रसन्न होतीं हैं और सुख-समृद्धि का वरदान देतीं हैं। विष्णुजी को तुलसी पत्र अर्पित करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
शनि दोष से राहत को करें तिल-जल से स्नान
कार्तिक पूर्णिमा पर जल में तिल डालकर स्नान करने से शनि दोष समाप्त होते हैं। खासकर शनि की साढ़ेसाती, पितृदोष, चांडाल दोष आदि से पीड़ित जातकों के लिए यह अत्यंत ही लाभप्रद है।