माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। मत्स्य विभाग में भ्रष्टाचार की परतें खुलने के बाद भी कार्रवाई जमीन पर असर दिखाती नजर नहीं आ रही। निरीक्षक के निलंबन और उपनिदेशक समेत 10 अफसर-कर्मचारियों को निदेशालय अटैच किए जाने के दो दिन बाद भी अधिकांश संबंधित कर्मियों ने नई तैनाती पर ज्वाइन नहीं किया है। हैरानी की बात यह है कि कई कर्मचारी अभी भी जिला कार्यालय में ही सक्रिय दिखे, जिससे पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की आशंका और गहरा गई है।
जिले में वर्ष 2023 से सहायक निदेशक मत्स्य का पद खाली रहने का फायदा उठाकर योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं। जिला स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी न होने से फाइलों में मनमानी, भुगतान में खेल और अनुदान योजनाओं में अनियमितता का रास्ता खुला रहा। अब जब कार्रवाई हुई तो संबंधित कर्मचारी दस्तावेज दुरुस्त करने में जुटे बताए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार के मामले में इंस्पेक्टर सुनील सिंह को निलंबित किया गया था, जबकि उपनिदेशक सुनीता वर्मा, मत्स्य विकास अधिकारी कुसुम पाल, अपर सांख्यिकीय अधिकारी केसी वर्मा सहित कई कर्मचारियों को निदेशालय अटैच किया गया। आदेश के बावजूद ज्वाइनिंग न देना विभागीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
उधर नए सहायक निदेशक मत्स्य जितेंद्र कुमार ने चार्ज लेने के बाद संकेत दिए हैं कि पूर्व में हुई मनमानी और लापरवाही की जांच कराई जा रही है। जिला स्तरीय मत्स्य समिति की बैठक जल्द बुलाने की तैयारी है और अनुदान से जुड़ी फाइलों की भी गहन जांच चल रही है, जिससे पूरे खेल का खुलासा हो सके।