तीन डॉक्टरों ने किया पोस्टमार्टम
उसकी आवाज चिड़ियाघर में गूंजती रही। करीब 11 बजे उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद डॉ. बिपिन सचान, डॉ. नितेश कटियार और डॉ. नासिर की टीम ने पोस्टमार्टम किया। जांच में उसके मसूड़े सफेद पाए गए और खून काफी गाढ़ा मिला। सीने का परीक्षण करने पर काफी रक्त निकला।
शेरों के कुनबे में अब नंदिनी, उमा और शंकर ही बचे
फेफड़े के बाएं हिस्से में लगभग 100 ग्राम का ट्यूमर मिला। चिकित्सकों के अनुसार ट्यूमर फटने से खून फेफड़ों में भर गया, जिससे हृदय ने काम करना बंद कर दिया और उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव चिड़ियाघर परिसर में दफना दिया गया। अजय की मौत से बब्बर शेरों के कुनबे में अब नंदिनी, उमा और शंकर ही बचे हैं।
2016 में रायपुर से लाया गया था जोड़ा
वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ के रायपुर से अजय और नंदिनी की जोड़ी को कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था। उस समय नंदिनी काफी कमजोर थी और उसके जीवित रहने की संभावना कम मानी जा रही थी। वन्यजीव विशेषज्ञों की सलाह पर अमेरिका से विशेष दूध मंगाकर उसकी देखभाल की गई, जिसके बाद वह स्वस्थ हुई।
दो शावकों की मौत हो गई और एक को बचा लिया गया
वर्ष 2017 में नंदिनी ने पहली बार तीन शावकों को जन्म दिया। हालांकि दो शावकों की मौत हो गई और एक को बचा लिया गया। इसके छह माह बाद नंदिनी ने फिर दो शावकों को जन्म दिया। बाद में शंकर, उमा और सुंदरी भी परिवार का हिस्सा बने। सुंदरी को बाद में तिरुपति भेज दिया गया। अजय-नंदिनी की जोड़ी ने कानपुर चिड़ियाघर को बब्बर शेरों के सफल प्रजनन केंद्र के रूप में पहचान दिलाई।