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यूपी: ‘हैलो, हैव यू इन डेब्ट?’ 12वीं पास फर्राटेदार अंग्रेजी से करते थे ठगी, वसूलते थे पाउंड-डॉलर, पढ़ें मामला

Wed, 09 Sep 2026 01:38 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: जाजमऊ के फर्जी कॉल सेंटर मामले में साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। 12वीं पास युवक क्लाउड कॉलिंग के जरिए यूके के लोगों से लोन सेटलमेंट के नाम पर पाउंड व डॉलर एंठ रहे थे, जिसका मुख्य सरगना लखनऊ से नेटवर्क चला रहा था।
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साइबर अपराध - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कानपुर में महज 12वीं पास युवकों ने फर्राटेदार अंग्रेजी बोल यूनाइटेड किंगडम (यूके) के कई लोगों को अपने जाल में फंसाया है। उन्हें क्रेडिट इन्वेस्टिगेटिंग डिपार्टमेंट से कॉल किए जाने की बात कहकर लोन सेटलमेंट और बीमा पॉलिसी की बकाया किस्तों में छूट दिलाने का लालच देते और बदले में पाउंड व डॉलर वसूल रहे थे। यह जानकारी क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम ब्रांच पुलिस को सोमवार रात जाजमऊ के केडीए चौराहा स्थित बिल्डिंग से पकड़े गए कॉल सेंटर की पड़ताल से हुई।

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साइबर क्राइम ब्रांच ने सेंटर के मैनेजर अब्दुल वाहिब, लखनऊ में कॉल रिसीव करने वाले युवराज शुक्ला और इंटरनिटी डिजी इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई है। पुुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि कमिश्नरी की क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम पुलिस को केडीए चौराहा के जमजम अपार्टमेंट में फर्जी कॉल सेंटर की सूचना मिली थी। वहां दबिश दी गई। जाजमऊ निवासी मैनेजर अब्दुल वाहिब, चार युवतियां और सात युवक मिले।

दो पन्नों की स्क्रिप्ट भी दी जाती थी
वाहिब ने पूछताछ में बताया कि कॉल सेंटर इंटरनिटी डिजी इन्फो टेक के नेतृत्व में काम कर रहा है। इसका मुख्यालय लखनऊ के विभूति खंड स्थित लबाना साइबर हाइट्स के आठवें फ्लोर पर है। कंपनी का मुखिया युवराज शुक्ला है। वहां 30-35 लोगों का स्टाफ है। जाजमऊ के कॉल सेंटर में युवाओं को डेढ़ माह की स्पेशल ट्रेनिंग दी गई थी। उन्हें क्या बोलना है इसके लिए दो पन्नों की स्क्रिप्ट भी दी जाती थी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अब्दुल वाहिब को 40 हजार रुपये मिलते थे, जबकि आमिर, हस्सान, फारुख, सत्यम, ताबिश, राहुल सहित अन्य को 18-22 हजार रुपये तक दिए जाते थे।

हैलो, हैव यू इन डेब्ट
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक हैलो, हैव यू इन डेब्ट (क्या आप कर्ज में हैं).. इन्हीं शब्दों के साथ कॉल सेंटर में बैठे शातिर यूके के लोगों के साथ बातचीत शुरू करते थे। उधर से हां आने के बाद कॉलर कहते कि उन्हें सीआईडी से डेटा मिला है। कंपनी इंडिविजुअल वॉलन्टियरी अरेंजमेंट(आईवीए) और हाउसिंग डिस रिपेयर(एचडीआर) पर काम करती है। आपका लोन सेटलमेंट करा देंगे। 10 किस्तों में सिर्फ तीन ही आपको देनी होगी। इसके लिए कुछ फीस है। राजी होने के बाद कॉल लखनऊ में बैठे युवराज को शिफ्ट कर दी जाती थी। वह फीस से लेकर किस्तें भी लेता था। कॉल डिस्कनेक्ट हो जाती थी।
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क्लाउड कॉलिंग का लेेते थे सहारा
साइबर थाना के प्रभारी अभय सिंह ने बताया कॉल ट्रेस न हो उसके लिए आरोपी क्लाउड कॉलिंग सिस्टम और वीसी डायलिंग सिस्टम का सहारा लेते थे। एक कर्मी को 250-300 कॉल करनी होती थीं। उनकी ऑनलाइन एक्सल शीट पर अटेंडेंस लगती थी। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक पकड़े गए अधिकांश लोग पहले बंद हो चुके कॉल सेंटर में काम कर चुके हैं। जैसे वाहिब निफ्टेल और सैफ जेडए कनेक्ट में काम करता था। एसआई सद्दाम खान की तहरीर पर धोखाधड़ी, आईटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर हुई है। युवराज शुक्ला के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। अब तक कितने रुपये वसूले गए, इसका पता लगाया जा रहा है।
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