दो पन्नों की स्क्रिप्ट भी दी जाती थी
वाहिब ने पूछताछ में बताया कि कॉल सेंटर इंटरनिटी डिजी इन्फो टेक के नेतृत्व में काम कर रहा है। इसका मुख्यालय लखनऊ के विभूति खंड स्थित लबाना साइबर हाइट्स के आठवें फ्लोर पर है। कंपनी का मुखिया युवराज शुक्ला है। वहां 30-35 लोगों का स्टाफ है। जाजमऊ के कॉल सेंटर में युवाओं को डेढ़ माह की स्पेशल ट्रेनिंग दी गई थी। उन्हें क्या बोलना है इसके लिए दो पन्नों की स्क्रिप्ट भी दी जाती थी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अब्दुल वाहिब को 40 हजार रुपये मिलते थे, जबकि आमिर, हस्सान, फारुख, सत्यम, ताबिश, राहुल सहित अन्य को 18-22 हजार रुपये तक दिए जाते थे।
हैलो, हैव यू इन डेब्ट
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक हैलो, हैव यू इन डेब्ट (क्या आप कर्ज में हैं).. इन्हीं शब्दों के साथ कॉल सेंटर में बैठे शातिर यूके के लोगों के साथ बातचीत शुरू करते थे। उधर से हां आने के बाद कॉलर कहते कि उन्हें सीआईडी से डेटा मिला है। कंपनी इंडिविजुअल वॉलन्टियरी अरेंजमेंट(आईवीए) और हाउसिंग डिस रिपेयर(एचडीआर) पर काम करती है। आपका लोन सेटलमेंट करा देंगे। 10 किस्तों में सिर्फ तीन ही आपको देनी होगी। इसके लिए कुछ फीस है। राजी होने के बाद कॉल लखनऊ में बैठे युवराज को शिफ्ट कर दी जाती थी। वह फीस से लेकर किस्तें भी लेता था। कॉल डिस्कनेक्ट हो जाती थी।
क्लाउड कॉलिंग का लेेते थे सहारा
साइबर थाना के प्रभारी अभय सिंह ने बताया कॉल ट्रेस न हो उसके लिए आरोपी क्लाउड कॉलिंग सिस्टम और वीसी डायलिंग सिस्टम का सहारा लेते थे। एक कर्मी को 250-300 कॉल करनी होती थीं। उनकी ऑनलाइन एक्सल शीट पर अटेंडेंस लगती थी। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक पकड़े गए अधिकांश लोग पहले बंद हो चुके कॉल सेंटर में काम कर चुके हैं। जैसे वाहिब निफ्टेल और सैफ जेडए कनेक्ट में काम करता था। एसआई सद्दाम खान की तहरीर पर धोखाधड़ी, आईटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर हुई है। युवराज शुक्ला के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। अब तक कितने रुपये वसूले गए, इसका पता लगाया जा रहा है।