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कानपुर: नियम हुए सख्त तो चोरी-छिपे बना रहे पान मसाला, रिश्तेदारों के मकानों में लगाईं अवैध इकाइयां, पढ़ें डिटेल

Wed, 14 Oct 2026 10:14 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर में सरकार की सख्त निगरानी, मशीनों के अनिवार्य पंजीकरण और नए टैक्स नियमों से बचने के लिए ब्रांडेड पान मसाला कंपनियों ने कर चोरी का नया तरीका अपना लिया है। कंपनियों ने अपनी अधिकारिक इकाइयों में उत्पादन घटाकर रिश्तेदारों व किराए के कमरों में अवैध मिनी-इकाइयां संचालित करना शुरू कर दिया है।
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पान मसाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सरकार की कड़ी निगरानी और नए करों के प्रभाव से बचने के लिए ब्रांडेड पान मसाला कंपनियों ने नया पैंतरा अपना लिया है। अब वह अपनी इकाइयों को पूरी क्षमता से नहीं चला रही हैं। उत्पादन कम कर दिया है। रिश्तेदारों के मकानों के कमरों में इकाइयां लगाई जा रही हैं। चोरी-छिपे चलने वाली इन इकाइयों को पैकिंग मशीन के साथ ही अलग-अलग प्रकार का कच्चा माल भी कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा है।

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एक फरवरी से पान मसाला, तंबाकू और सिगरेट उत्पादों पर 40 फीसदी जीएसटी के साथ स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उपकर तथा अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया था। इन उपायों से उत्पाद महंगे हो गए हैं। साथ ही पैकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। दरअसल, शहर में कुछ दिनों पहले कर विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की थी। इसमें कई नामी कंपनियों के पान मसाला रैपर और बड़े पैमाने पर कच्चा माल पकड़ा गया था।

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मामले की जांच लगातार चल भी रही है
टीम ने एक संचालक को गिरफ्तार करके करोड़ों की कर चोरी के मामले में कोर्ट में भी प्रस्तुत किया था। मामले की जांच लगातार चल भी रही है। जांच के दौरान इस तरह के तथ्य भी मिले हैंं, जिसमें ब्रांडेड कंपनियों के बीच सांठगांठ होने का अंदेशा जताया जा रहा है। इस दिशा में भी जांच की जा रही है। दरअसल, शहर में पान मसाला की 12 इकाइयां हैं। यहां देश के प्रसिद्ध ब्रांड के पानमसाला तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा लखनऊ, नोएडा में तैयार होने वाले उत्पाद शहर आते हैं।

अलग-अलग प्रकार के उपकर का भुगतान किया जाना है
एक फरवरी को आए नए नियमों में फैक्टरी संचालक को यह भी बताना था कि पान मसाला फैक्टरी में कितनी मशीनें हैं। हर फैक्टरी को अलग-अलग पंजीकरण कराना था। सात दिन के भीतर मशीनों की अधिकतम रेटेड स्पीड आदि भी स्पष्ट करनी होती है। इनसे बचने के लिए इकाइयों ने अपना उत्पादन घटाना शुरू कर दिया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि पान मसाला के उत्पादन की क्षमता के आधार पर अलग-अलग प्रकार के उपकर का भुगतान किया जाना है।

अवैध इकाइयों पर लगातार की जा रही है कार्रवाई
यह जीएसटी एवं एक्साइज के अलावा अलग से भुगतान करना होता है। एक कंपनी का प्रतिदिन का घोषित कारोबार पहले 25 करोड़ था जो अब 15-20 करोड़ दिखाया जा रहा है, जबकि पानमसाला की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उत्पादन कम दिखाया जा रहा है, लेकिन कमरों में इकाइयां संचालित करने वाला जुगाड़ निकालकर चोरी-छिपे काम शुरू किया गया है। एसजीएसटी के अपर आयुक्त कुमार आनंद का कहना है कि कर चोरी के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। अवैध इकाइयों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।

पूरे उत्पादन के आंकड़ों को नहीं करते घोषित
मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की जीएसटी कमेटी के चेयरमैन संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि सरकार का मानना है कि इन वस्तुओं के निर्माता एवं ट्रेडिंग करने वाले व्यापारी न तो अपने सही व पूरे उत्पादन के आंकड़ों को घोषित करते हैं और न ही सरकार को सही राजस्व की अदायगी करते हैं। इसके चलते ही नए नियम लागू किए गए थे।

एक मशीन पांच घंटे में तैयार करती 15 हजार पाउच
मशीनों पर सरकार इसलिए निगरानी बढ़ा रही है ताकि कर चोरी खत्म की जा सकी। एक मशीन यदि पांच घंटे तक लगातार चलती है तो 15 हजार पाउच तैयार होते हैं। इससे जुड़े कारोबारी कई शिफ्टों में माल तैयार करते हैं या फिर ऑर्डर के अनुरूप लगातार मशीनें चलवाते हैं लेकिन कारोबारी आंकड़ों में हमेशा कम मशीन चलना दिखाता है। इसके चलते तैयार और कच्चा माल, पैक माल में भी कर चोरी की जाती है।

ये हैं नियम
  • उपभोक्ता मामलों के विभाग के लीगल मेट्रोलॉजी रूल्स के तहत अब 10 ग्राम या उससे छोटे पैकेट सहित सभी पान मसाला पैकेटों पर खुदरा बिक्री मूल्य लिखना अनिवार्य कर दिया गया है, जिन्हें पहले छूट मिली हुई थी
  • पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर पान मसाला पर नया सेस और अतिरिक्त टैक्स व्यवस्था लागू की गई है। पान मसाला पर 40% जीएसटी निर्धारित किया गया है।
  • विशेष मूल्यांकन नियम के तहत टैक्स चोरी रोकने और पारदर्शिता के लिए पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी की गणना अब इनवॉइस वैल्यू की जगह रिटेल सेल प्राइस के आधार पर की जाएगी।
  • इकाइयों में हो रहे उत्पादन के अलग-अलग रिटर्न एक सप्ताह से लेकर 30 दिन के भीतर जारी करने होंगे।
  • कितनी बिजली खपत की गई है और कितना उत्पादन किया है यह भी रिटर्न में बताना होगा।
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अगरबत्ती फैक्टरी में बन रहा था पान मसाला
एसजीएसटी के अफसरों ने 15 सितंबर को इस्पातनगर में अवैध पान मसाला और पैकिंग फैक्टरी पर छापा मारा था। यहां पर कई बड़े ब्रांडों की पैंकिंग मैटीरियल मिला था। एक वर्टिकल पाउच पैकिंग मशीन जब्त की थी। भवन परिसर गुलाल और अगरबत्ती निर्माण के लिए किराये पर दिया गया था। इसी तरह गुजैनी में 12 सितंबर को छापा मारा गया था। यहां पर भी कई बड़े ब्रांडों के उत्पाद बनते मिले थे। इन दोनों इकाइयों का पंजीकरण ही नहीं था। ये इकाइयां फरवरी महीने के अंत में खुली थी और चोरी-छिपे काम हो रहा था।
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