फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: क्रस्ट लेदर निर्यात में अब पाक के शहरों से मुकाबला करेगा कानपुर, निर्यात शुल्क 20 से घटाकर शून्य किया गया

Sun, 02 Feb 2025 12:54 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: शुल्क लगने से उत्पाद का मूल्य 11 प्रतिशत ज्यादा रहता था। अब इसे खत्म कर दिया गया, तो उत्पाद की कीमत में 11 प्रतिशत की कमी हो सकेगी। दाम कम होगा तो उत्पाद अन्य देशों के मुकाबले सस्ता तैयार होगा, जिससे निर्यात बढ़ सकेगा।
विज्ञापन
जाजमऊ लेदर इंडस्ट्रीज - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर में आम बजट में वित्तमंत्री ने गीला नीला (वेट ब्ल्यू) चमड़ा से आयात शुल्क खत्म करने का ऐलान किया है। इससे शहर के चमड़ा कारोबारियों-निर्यातकों के चेहरे पर खुशी आ गई है। पहले 11 प्रतिशत शुल्क लगता था। इसी तरह क्रस्ट लेदर पर निर्यात शुल्क 20 प्रतिशत से घटाकर शून्य किया गया है। इसके अलावा फोकस उत्पाद योजना की घोषणा की गई है। इससे चमड़े के जूते और उत्पादों के साथ ही नॉन लेदर की गुणवत्ता वाले जूतों के उत्पादन के लिए आवश्यक डिजाइन क्षमता, निर्माण और मशीनरी के लिए करीब छह हजार करोड़ का पैकेज मिलेगा, जिससे उत्पाद की लागत कम होगी और निर्यात में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

विज्ञापन

वहीं, कानपुर समेत यूपी में दो बड़े लेदर क्लस्टरों के खुलने की संभावना है। इस पर प्रदेश सरकार के साथ बात शुरू हो गई है। इसमें विश्व के बड़े फुटवियर ब्रांडों को आमंत्रित कर एमओयू किया जाएगा। वित्त मंत्री की नई घोषणा से अकेले फिनिस्ड लेदर के क्षेत्र में 500 करोड़ का निर्यात बढ़ने की संभावना है। क्लस्टरों के बढ़ने से पांच से सात हजार करोड़ का निर्यात बढ़ सकेगा। शहर चमड़ा और चमड़ा से बने उत्पादों के लिए जाना जाता है। पूर्व सालों की तुलना में शहर से चमड़ा उत्पादों का निर्यात तेजी से बढ़ा, लेकिन दो युद्धों के चलते मांग मंद पड़ गई।

उत्पाद की कीमत में 11 प्रतिशत की हो सकेगी कमी
चीन, वियतनाम, कंबोडिया, ताइवान, बांग्लादेश को पछाड़ने के लिए शहर के चमड़ा कारोबारी लंबे समय से वेट ब्ल्यू, क्रस्ट लेदर पर लगने वाले शुल्कों को खत्म करने की मांग कर रहे थे। वेट ब्ल्यू तैयार चमड़े के पहले की प्रक्रिया होती थी। तीन साल पहले इसके आयात पर शुल्क लगा दिया गया। वेट ब्ल्यू का यूरोपीय देशों के साथ ही ब्राजील से आयात किया जाता था। इसका इस्तेमाल निर्यात होले वाले उत्पादों जैसे जैकेट, गारमेंट, सैडलरी, फुटवियर में होता था। शुल्क लगने से उत्पाद का मूल्य 11 प्रतिशत ज्यादा रहता था। अब इसे खत्म कर दिया गया, तो उत्पाद की कीमत में 11 प्रतिशत की कमी हो सकेगी।

पिछले साल 7000 करोड़ का का निर्यात किया था
दाम कम होगा तो उत्पाद अन्य देशों के मुकाबले सस्ता तैयार होगा, जिससे निर्यात बढ़ सकेगा। इसी तरह क्रस्ट लेदर का निर्यात किया जा सकेगा। अभी शहर से क्रस्ट लेदर का निर्यात नहीं किया जाता था। इस क्षेत्र में पाकिस्तान की अच्छी दखल है। पिछले साल 7000 करोड़ का चमड़ा और चमड़ा उत्पादों का निर्यात किया गया था। इसके बाद पहले रूस-यूक्रेन, फिर इस्राइल-हमास युद्ध से निर्यात पर असर पड़ा है। लाल सागर में माल लुटने का डर निर्यातकों के सामने रहा। लंबा रूट तय करने के कारण कंटेनरों की समस्या देखी गई और मालभाड़ा बढ़ चुका है। ऐसे में शहर के चमड़ा कारोबारियों के सामने तमाम चुनौतियां थीं।
विज्ञापन

  • चमड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए वेट ब्ल्यू से आयात शुल्क खत्म किया गया है। सरकार ने चमड़ा उद्योग की सभी बड़ी मांगों को पूरा किया है। फोकस प्रोडक्ट स्कीम मील का पत्थर साबित होगी। फुटवियर सेंटर में इसका बूम अगले दो साल में और पूरे चमड़ा उद्योग में पांच साल में इसका प्रभाव दिखेगा। पैकेज में 550 करोड़ ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए आरक्षित होने का अनुमान है। इससे चमड़ा उद्योग का निर्यात बढ़ेगा। उत्पाद वैश्विक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।  -राजेंद्र कुमार जालान, राष्ट्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
  • क्रस्ट लेदर पर भारी भरकम निर्यात शुल्क था, जिसेे कम करने की मांग की गई थी। 20 प्रतिशत शुल्क का शून्य कर दिया गया है। वैश्विक निर्यात को बढ़ाने के लिए उत्पाद के दाम कम से कम रखने होते हैं। जूते और चमड़ा क्षेत्र के लिए केंद्रित योजना प्रस्तावित की गई है।  -मुख्तारुल अमीन, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
  • क्रस्ट लेदर पर निर्यात शुल्क खत्म कर दिया गया है। अभी तक इसका निर्यात नहीं होता था। इससे निर्यातकों का लाभ होगा। पाकिस्तान का इस क्षेत्र में अभी वैश्विक दखल है, जिसे चुनौती दी जा सकेगी। सरकार का ये बहुत अच्छा कदम है। हालांकि कच्चा चमड़ा पर शुल्क नहीं हटाया गया है।  -असद इराकी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
  • तीन साल पहले सरकार ने वेट ब्ल्यू पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया था, इसमें एक प्रतिशत सेस भी है। इससे चमड़े से ही जूते, पर्स, बेल्ट तैयार होते हैं। इसकाे यूरोपीय देशों से आयात किया जाता है। अब शुल्क खत्म कर दिया गया है। इससे निर्यात कई गुना तक बढ़ सकेगा।  -यादवेंद्र सचान, सदस्य, चर्म निर्यात परिषद और निर्यातक
  • चमड़ा और फुटवियर उद्योग को मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण नीतिगत उपाय किए गए हैं। उद्योग को प्रोत्साहन दिया गया है। सरकार ने उत्पादकता, गुणवत्ता बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने के तहत बजट में प्रावधान किया गया है। कौशल विकास के लिए प्रोत्साहन दिया गया है। -जावेद इकबाल, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
  • फोकस उत्पाद योजना की घोषणा से चमड़े के जूते और अन्य उत्पादों के अलावा नॉन लेदर की गुणवत्ता वाले जूते के उत्पादन बढ़ सकेगा। आवश्यक डिजाइन क्षमता, मशीनरी का समर्थन किए जाने की पहल से निर्यातकों को लाभ मिलेगा। जिससे उनकी लागत कम होगी और निर्यात में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।  -आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फेडरेशन आफ इंडिया एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें