जब पति पड़ा अकेला पत्नी ने संभाला व्यापार
13 सितंबर 2017 को अपने परिवार से विवाद के बाद अलग हुए पति राज कुमार अग्रवाल को टूटता और अवसाद में जाता देख विजय नगर निवासी प्रीति अग्रवाल ने व्यापार संभालने की ठानी। कौशलपुरी की एक खाली दुकान से शुरुआत करना एक बड़ी चुनौती थी। राज कुमार अपना पुश्तैनी कार्य फूलों का काम करने से कतरा रहे थे तो प्रीति ने एक स्टेशनरी की दुकान खोली। दो माह बाद हुई तेज बारिश से दुकान में पानी भर गया और माल खराब होने के साथ पूरी जमा पूंजी एकत्र कर लगाई गई लागत के एक लाख रुपये डूब गए। इस ‘चोट’ ने राजकुमार को और तोड़ दिया लेकिन प्रीति ने हार नहीं मानी। उन्हें पति को देखना था और बच्चों की परवरिश भी। प्रीति ने राजकुमार के पुश्तैनी काम को चुना। पहले फूल बेचने शुरू किए फिर गुलदस्ते बनाने का काम सीखा। वक्त के साथ हुनर भी आ गया जिससे जीवन की गाड़ी चल पड़ी। आज साढ़े चार साल से दुकान कौशलपुरी में चल रही है। अब दंपती मिलकर दुकान को संभाले हैं।