आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी के दाहिने हाथ में ऐसा क्या हुआ था जिसके लिए उसे शरीर से अलग करना पड़ गया। इसकी जानकारी के लिए गुरुवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षण किया जाएगा। सीएमओ की गठित टीम ने बुधवार शाम हाथ को केमिकल से संरक्षित कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस और डॉक्टरों की टीम उसे मेडिकल कॉलेज ले जाएगी।
विकास सिंह के मुताबिक उन्होंने 13 मई की शाम करीब छह से सात बजे के बीच मां को कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। उन्हें चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. वी कुमार और डॉ. अनुज महरोत्रा देख रहे थे। वह 14 मई की सुबह मां से मिलने पहुंचे तो उनके दाहिने हाथ में दर्द और सूजन थी। डॉक्टरों ने ठीक हो जाने का दावा किया। इसके बाद सीजन और ज्यादा बढ़ती गई। स्थिति ठीक न देख 14 मई को मां को पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां 17 मई को डॉक्टरों को हाथ में संक्रमण अधिक फैल जाने के कारण काटना पड़ा।
आईटीबीपी जवान ने आरोप लगाया कि महज 12 घंटे में ऐसा क्या हुआ, जिसके लिए हाथ सूजन आ गई और हाथ काटने की नौबत आई। उन्होंने पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों पर हाथ नष्ट कराने का दबाव बनाने के आरोप लगाए। हालांकि, उन्होंने अपने पास हाथ सुरक्षित रखने की बात कही। वहीं, बुधवार को सीएमओ की गठित टीम ने जांच की बात कहते हुए जवान से उनकी मां का हाथ ले लिया। उसको रसायनिक पदार्थों से संरक्षित किया। सुरक्षा के लिहाज से रेलबाजार पुलिस के हवाले कर दिया। गुरुवार को डॉक्टर और रेलबाजार पुलिस हाथ को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ले जाएगी। कमिश्नरी पुलिस के स्टाफ ऑफिसर अमरनाथ यादव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में हाथ का हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षण कराया जाएगा। यह सुविधा मेडिकल कॉलेज के पास है जिससे संक्रमण का पता चल जाएगा।
बहुत ही सूक्ष्म तरीके से होती है जांच
सीएमओ की गठित कमेटी के विशेषज्ञों के मुताबिक हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच अत्यधिक सूक्ष्म तरीके से होती है। इसमें शरीर से निकाले गए हिस्से में कैंसर, ट्यूमर और संक्रामक बीमारियों का पता लगाया जाएगा। विशेषज्ञ कोशिकाओं की बनावट का अध्ययन करते हैं। उसमें किस तरह से बदलाव हुआ इसकी जानकारी जुटाई जाती है।
कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों के हुए बयान
सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की । बुधवार को कमेटी कृष्णा हॉस्पिटल पहुंची। यहां के डॉक्टरों के बयान लिए। डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि कृष्णा हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट और जनरल फिजिशियन के बयान हुए हैं। बताया कि महिला को कार्डियक की समस्या थी। उन्हें आईटीबीपी के अस्पताल से रेफर किया गया था। उस समय उनकी स्थिति ठीक नहीं थी। परिजन महिला मरीज को लेकर कृष्णा हॉस्पिटल आए। यहां रोगी की इमरजेंसी में सभी जांचें कराई गईं। घरवाले इलाज से संतुष्ट नहीं हुए तो वह रोगी को पारस हॉस्पिटल ले गए। डॉ. रस्तोगी के मुताबिक बयान के लिए आईटीबीपी जवान विकास सिंह को भी बुलाया था लेकिन वह नहीं आए। अब गुरुवार को पारस अस्पताल, महिला रोगी के परिजन और आईटीबीपी अस्पताल के डॉक्टरों के बयान होंगे।