ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाई पुलिस
दिव्यांशी का दावा है कि आदित्य के खातों में दो करोड़ से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन हुए, जिन पर सवाल करने पर वह टालमटोल करता रहा। उधर, कथित गैंग का हिस्सा बताकर दिव्यांशी पर बीएनएस की 12 धाराएं लगाई गई थीं, लेकिन अदालत में पुलिस अपने दावों का समर्थन करने के लिए कोई ठोस डिजिटल या दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं कर पाई।
सच सामने आएगा, बस निष्पक्ष एसआईटी जांच जरूरी
बचाव पक्ष ने भी यही मुद्दा उठाया कि पुलिस अनुमान के आधार पर गिरफ्तारी और रिमांड मांग रही है। गिरफ्तारी के महज 24 घंटे के भीतर एसीजेएम कोर्ट ने पुलिस की आठ दिन की रिमांड अर्जी खारिज करते हुए दिव्यांशी को व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना ठोस सामग्री के रिमांड नहीं दी जा सकती। दिव्यांशी का कहना है कि सच सामने आएगा, बस निष्पक्ष एसआईटी जांच जरूरी है।