नया पश्चिमी विक्षोभ आने के बाद पछुवा पलटेगी और फिर लगातार बहेगी। हवा के साथ हिमालयी हवाएं कंपकंपी छुड़ा देंगी। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती घेरा दो-तीन दिन का मेहमान है। इसके बाद हवाओं का बहाव ढर्रे पर लौट आएगा। चक्रवाती घेरे के कारण हवाएं सुस्त होने के साथ उनका रुख तेजी से बदलता है। गुरुवार को जब तक धूप रही पारा चढ़ा रहा। लेकिन जैसे ही दिन ढलना शुरू हुआ ठंड और माहौल में गलन बढ़ गई। सुबह 7.40 बजे दृश्यता सामान्य दो किमी की तुलना में 370 मीटर पर रही।
धूप के ढलते ही पारा गिर जा रहा है। गुरुवार दोपहर अधिकतम पारा सामान्य औसत से 2.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है। लेकिन रात का न्यूनतम पारा सामान्य औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस कम रहा। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण शाम को ठंड अधिक बढ़ रही है। हवा के जरा से तेज होते ही गलन बढ़ जाती है। इस समय उत्तर-पूर्वी हवाएं प्रति घंटा डेढ़ किमी की रफ्तार से चल रही हैं। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि दो-तीन दिन के बाद चक्रवाती घेरे का असर खत्म हो जाएगा। इससे उत्तर पश्चिमी हवाओं में निरंतरता आएगी।
उन्होंने निम्न दबाव के कारण हवाओं के रुख में ठहराव नहीं आ पाता है। इसका असर तापमान पर भी आता है। इसके साथ ही जनवरी के अंत में ला-नीना के भी सक्रिय होने का अनुमान है। इससे जेट स्ट्रीम समुद्र तल की ठंडक लेकर आएंगी। डॉ. पांडेय ने बताया कि विश्व मौसम संगठन का अनुमान है कि इस बार ला-नीना बहुत कम दिनों के लिए सक्रिय होगा। जनवरी के पहले सप्ताह में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के ताकतवर होने के अनुमान है। इससे पूरी हिमालयी रेंज और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश हो सकती है। इसके साथ ही शीत लहरी चलने लगेगी।
तापमान
अधिकतम- 24.4 डिग्री सेल्सियस
न्यूनतम- 6.4 डिग्री सेल्सियस