मानसून के मिजाज ने परिक्षेत्र में उलटा असर दिखाया
अल नीनो का असर मई-जून से उभरना शुरू हुआ। इस घटना में पूर्वी मध्यरेखीय प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। जुलाई इसका असर आना शुरू हुआ। मौसम विभाग ने आशंका जाहिर की कि इससे 30-35 प्रतिशत बारिश कम हो सकती है पर मानसून के मिजाज ने परिक्षेत्र में उलटा असर दिखाया।
जुलाई और अगस्त दोनों में सामान्य औसत को बारिश ने पार किया
मानसून 10 दिन देर से दो जुलाई को पहुंचा। जून में प्री मानसूनी बारिश हुई। यह जून के सामान्य औसत से 15.3 मिमी कम रही लेकिन जुलाई में मानसून आते ही बारिश होने लगी। जुलाई और अगस्त दोनों में सामान्य औसत को बारिश ने पार किया। जुलाई की सामान्य बारिश 272.5 मिमी है, लेकिन 327.1 मिमी बारिश हुई।
बीच-बीच में मौसम प्रणालियां बनीं
अगस्त में तो 15 अगस्त तक ही बारिश ने सामान्य औसत पार कर दिया। 15 अगस्त बारिश का सामान्य औसत 134.3 मिमी है लेकिन बारिश 234.5 मिमी हुई। यह सामान्य से 100.2 मिमी अधिक है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के मौसम विभाग के नोडल एवं तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि मानसून पूरी तरह सक्रिय रहा। इसके बाद जैसे ही निम्न दबाव का क्षेत्र बना बारिश हो गई। बीच-बीच में मौसम प्रणालियां बनीं। इससे भी नमी आ गई और बारिश हो गई।