चक्रवाती हवाओं के घेरे ने रात में ठंडक बढ़ा दी है। रात का न्यूनतम पारा लुढ़क कर 7.5 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। यह तापमान सामान्य औसत से 1.5 डिग्री कम है। आसमान साफ रहने से दिन की धूप ने अधिकतम तापमान को गिरने नहीं दिया। लेकिन 48 घंटे में माहौल में नमी 32 फीसदी बढ़ गई। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अब ठंडक में इजाफा होता रहेगा। दोनों चक्रवाती घेरों की नमी के मिलने और दो दिन के बाद पश्चिमी विक्षोभ के लौटते ही दिन का तापमान भी गिरेगा।
इससे दिन में ठंडक और बढ़ेगी। इसके साथ ही जेट स्ट्रीम भी नीचे आ गईं। ये समुद्री हवाएं प्रशांत महासागर की नमी लेकर आएंगी। इस समय माहौल में दो तरफ से नमी आ रही है। एक अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती घेरे और दूसरे जम्मू-कश्मीर में रुके पश्चिमी विक्षोभ के चक्रवाती क्षेत्र से। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय का कहना है कि अभी ये दोनों नमी एक-दूसरे से मिली नहीं हैं लेकिन इनके असर माहौल में नमी बढ़ी है।
तराई वाले इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी हो रही है। कानपुर परिक्षेत्र में इसके असर एक-दो दिन में बादल आ जाएंगे। इससे दिन का तापमान गिरेगा। अभी हिमालयी क्षेत्र से आ रहीं उत्तर पश्चिमी हवाओं की निरंतरता के कारण रात न्यूनतम तापमान गिर गया है। 48 घंटों के अंदर न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस तापमान नीचे आया है।
इसके अलावा पश्चिमी विक्षोभ के रहने से नमी तो आ रही है लेकिन हवाओं की गति अधिक नहीं है। लेकिन जैसे ही दो दिन बाद पश्चिमी विक्षोभ का असर कम होगा हवाओं की गति बढ़ने लगेगी जिसकी वजह से ठंडक बढ़ जाएगी। उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव की तरफ से आने वाली जेट स्ट्रीम हवाएं नीचे आ गई हैं। अभी तक ये हवाएं 1200 किमी ऊपर वातावरण में बह रही थीं। अब ये छह सौ किमी पर आ गई हैं। जेट स्ट्रीम अपनी साथ समुद्र तल की नमी लेकर आती हैं। इससे जाड़े के मौसम में सर्दी अधिक तेज हो जाती है। सीएसए के मौसम विभाग के तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि 24 घंटे में धुंध बढ़ी है। रविवार सुबह दो किमी के स्थान पर दृश्यता नौ सौ मीटर पर आ गई। आने वाले दिनों में धुंध और कोहरा और बढ़ेगा जिससे दृश्यता घटेगी।
अभी तक ला नीना सक्रिय नहीं
वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि प्रशांत महासागर में होने वाला मौसम पैटर्न ला नीना अभी तक सक्रिय नहीं है। इसे अक्टूबर में सक्रिय होना था लेकिन दिसंबर में भी नहीं हुआ है। इसके सक्रिय होने पर मध्य-पूर्व मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान कम होने लगता है। इससे ठंड का प्रभाव बढ़ जाता है। हवाएं सामान्य से अधिक तेज चलने लगती हैं। ला नीना की वजह से उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दियां ज्यादा होती हैं।