मां और बच्चे दोनों के लिए हो सकता है नुकसानदायक
इस थैली या झिल्ली को एमनियोटिक मेंब्रेन (थैली) कहा जाता है। ये थैली शिशु की गर्भ में रक्षा करती है। शिशु जब पूरा विकसित हो जाता है, तो लेबर पेन शुरू होने से पहले गर्भवती महिलाओं में थैली फट जाती है। अगर 37 सप्ताह के बाद पानी की थैली फटती है, तो यह लेबर पेन का संकेत होता है। 28 से 37 सप्ताह के बीच अगर पानी की थैली फटती है, तो मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
गर्भावस्था में विकसित भी नहीं हो पाता है बच्चा
थैली फटने से यूरीनल इंफेक्शन या वेजाइनल इंफेक्शन भी होते हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी के कारण महिलाओं में यह थैली फट रही है। जिन महिलाओं का भ्रूण 28 से 37 सप्ताह के बीच का है, उनकी तो डिलीवरी हो रही है। इससे कम वालों की दवाओं ही दी जा सकती है, क्योंकि इतनी कम समय की गर्भावस्था में बच्चा विकसित भी नहीं हो पाता है।
इसलिए फूट रही पानी की थैली
डॉ. शैली ने कहा कि गर्मी बहुत है, ऐसे में गर्भवती महिलाएं पानी की कमी न होने दें। गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर को पानी चाहिए और बच्चे को भी पानी की आवश्यकता रहती है, क्योंकि बच्चे को भी पानी में घूमना है। अगर पानी ठीक से नहीं पीयेंगी तो शरीर में पानी की भी कमी होगी और बच्चा भी जिस पानी में घूमता है तो उसमें भी कमी आएगी।
केस- 1
32 सप्ताह की एक गर्भवती को आधी रात में अचानक पानी का तेज बहाव महसूस हुआ। परिवार के लोग नजदीक के निजी अस्पताल लेकर गए तो वहां से हैलट रेफर किया गया। यहां महिला को भर्ती कर प्रसव कराया गया। समय से पहले जन्मे बच्चे की वजह से उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी तो उसे एनआईसीयू में भर्ती किया गया। पानी की कमी होने से महिला की एमनियोटिक मेंब्रेन फट गई थी।
केस-2
27 सप्ताह की एक गर्भवती पानी के रिसाव की शिकायत लेकर हैलट ओपीडी आई, जांच में पता चला कि उसकी एमनियोटिक मेंब्रेन फट गई है। महिला का बच्चा पूरी तरह विकसित नहीं हुआ था। इसलिए उसे दवाओं से ठीक करने की कोशिश की गई। महिला का अभी भी इलाज चल रहा है।
गर्मी में गर्भवती महिलाएं रखें ध्यान
- तेज धूप में सुबह 10 से शाम चार बजे के बीच न निकलें।
- कोशिश करें कि ठंडी जगह पर ही रहें।
- दिन भर में ढाई से तीन लीटर पानी पीयें।
- नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ, लस्सी, ताजे फलों का जूस बिना चीनी मिलाए लें।
- चाय कॉफी और चीनी वाले पेय पदार्थों से दूर रहें।
- नियमित अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें।टुकड़े-टुकड़े में हल्का सुपाच्य और पौष्टिक भोजन लें।
- हल्के ढीले सूती कपड़े पहनें।