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विनीत मिनोचा मर्डर: 'रिश्तों की कड़वाहट और कर्ज ‘, साढ़े तीन घंटे पहले बनी थी प्लानिंग, कदम-कदम पर चूकी पुलिस

Sat, 26 Sep 2026 09:14 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur Murder News: विनीत मिनोचा हत्याकांड में नए खुलासों ने पूरी साजिश से पर्दा उठा दिया है। पुलिस जांच के अनुसार, हत्या की साजिश वारदात से महज साढ़े तीन घंटे पहले रची गई थी। सुब्रत पर करीब 35.5 लाख रुपये का भारी कर्ज था और वह सट्टेबाजी का आदी था। सुब्रत ने साथी राजकिशोर को तैयार कर पिता की हत्या करवाई।
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दवा कारोबारी हत्याकांड - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में दवा कारोबारी की हत्या की प्लानिंग उनकी हत्या से महज साढ़े तीन घंटे पहले ही बनी तो शायद यह गलत नहीं होगा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पांच सितंबर की रात 11:30 बजे विनीत मिनोचा की हत्या की गई थी। इससे पहले इसी दिन शाम छह बजे से लेकर आठ बजे के बीच सुब्रत ने चार बार फोन कर विशाल से बात की। इसी समय के दौरान ही विशाल ने भी अपने साथी राजकिशोर को चार बार ही फोन किया।

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पुलिस मान रही है कि सुब्रत ने अपने पार्टी पर जाने के दौरान ही पिता को मौत के घाट उतारना मुनासिब समझा। सुब्रत से बात करते हुए विशाल ने भी आनन-फानन राजकिशोर को तैयार किया। रात 9:30 बजे शालू-सुब्रत के पार्टी के लिए निकलते ही दोनों हत्यारोपी अपार्टमेंट में दाखिल हुए। रिमांड के दौरान विशाल ने पुलिस को बताया कि उसने साथी राजकिशोर को हत्या के बाद 40 हजार रुपये देने की बात कही थी।

नफरत करने वाले अधिक थे
नफरत की दीवारों से बना था कारोबारी का घरयूं तो दवा कारोबारी के घर में किसी चीज की कमी नहीं थी। परिवार छोटा जरूर था, लेकिन एक-दूसरे को प्यार करने वाले कम और नफरत करने वाले अधिक थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार सुब्रत की मां पुनीता अपने पति विनीत और बहू शालू को नहीं पसंद करती थी, तो शालू की भी अपनी सास से नहीं बनती थी। विनीत बेटे सुब्रत को नकारा, तो सुब्रत अपने पिता को अय्याश मानता था।

नफरत की दीवारों से बना हुआ था घर
रही बात शालू और सुब्रत की, तो रिमांड के दौरान बार-बार शालू कहती रही कि सुब्रत मैं तुमसे प्यार करती हूं, फिर तुमने ऐसा क्यों किया, लेकिन सुब्रत मुंह फेरे बैठा रहा। इससे साफ है कि अपार्टमेंट स्थित कारोबारी का घर नफरत की दीवारों से बना हुआ था। रही बात शालू-सुब्रत के बेटे जय की तो वह शालू के जेल जाने के बाद दादी और पिता के पास रहने के बजाय अपने लखनऊ स्थित ननिहाल में रह रहा है।

सट्टे में गंवाए दो लाख तो कराई थी चोरी
पुलिस ने बताया कि विनीत की दुकान के कर्मचारियों से पूछताछ करने से पता चला कि सुब्रत को आईपीएल में सट्टा लगाने की भी लत थी। इस बार भी अप्रैल-मई के दौरान हुए मैचों में सट्टा लगाने के दौरान वह दो लाख रुपये का कर्जदार हो गया था। इसे चुकाने के लिए उसने 19 जून को विशाल के माध्यम से अपनी दुकान में चोरी कराई थी। इसकी जानकारी होने पर विनीत ने सुब्रत को सभी के सामने फटकारा था।

सुब्रत पर इतना कर्ज
  • शालू के पिता से लिए- 14 लाख
  • दो दोस्तों से लिए- करीब 12 लाख
  • मनी व्यू से लिए- 5.0 लाख
  • एनएवीआई एप से लिए- 3.0 लाख
  • आईसीआईसीआई बैंक से लिए- 75,000
  • एक्सिस बैंक से लिए- 50,000
  • आरबीएल बैंक से लिए- 25,000

इस तरह कदम-कदम पर चूकी पुलिस
  • विशाल ने जब शालू का नाम लिया तभी सुब्रत ने भी विशाल को पहचानने से इन्कार किया। ऐसे में सुब्रत को बिना हिरासत में लिए सीधे शालू को जेल क्यों भेजा गया।
  • पुलिस विशाल, शालू और राजकिशोर का मोबाइल खंगालती रही लेकिन सुब्रत का मोबाइल तक चेक नहीं किया। सुब्रत ने हत्या के बाद व्हाट्सएप चैट, वॉयस नोट और ऑडियो कॉल डिलीट की थी। यहीं से उसके आरोपी होने का बड़ा आधार मिल सकता था।
  • घर में न तो चोरी हुई और न कोई विनीत की किसी से रंजिश थी। ऐसे में पुलिस ने कैसे मान लिया कि विशाल जो कहा रहा वही सही है।
  • यदि पुलिस कस्टडी रिमांड न मिलती और विशाल व सुब्रत का आमना-सामना न होता तो इसका खामियाजा सीधे तौर पर शालू को ही भुगतना पड़ता और वह अभी भी सलाखों के पीछे ही रहती।

रिहाई के बाद मायके जाएगी शालू
शालू को क्लीनचिट मिलने के बाद उसके भाई धीरज अरोड़ा का कहना है कि पिछले दिनों उसके साथ जो कुछ भी हुआ उसकी कल्पना वह सपने में भी नहीं कर सकते थे। मायका हो या ससुराल शालू के रहन-सहन में कहीं कोई कमी नहीं थी। उस शालू को इन 20 दिनों में सुब्रत की वजह से न सिर्फ जमाने से मुंह छिपाना पड़ा बल्कि सलाखों के पीछे की तकलीफों का भी सामना करना पड़ा। ऐसे में उसे वापस अपार्टमेंट भेजना तो ठीक नहीं रहेगा इसलिए वे लोग उसे लेकर सीधे लखनऊ ही आएंगे। अचानक इतना सब कुछ हो गया कि शालू को सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा। 
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विवेचक को कोर्ट में देनी होगी अर्जी
शालू के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि विवेचना में शालू की नामजदगी गलत पाए जाने के आधार पर विवेचक को न्यायालय में प्रार्थना पत्र देना होगा। इसके बाद कोर्ट शालू को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश देगी। इसके बाद रिहाई परवाना जेल भेजा जाएगा। तभी जेल से शालू की रिहाई हो सकेगी। शुक्रवार तक तो कोर्ट को पुलिस की ओर से कोई प्रार्थना पत्र नहीं मिला है। शनिवार और रविवार को न्यायालय में अवकाश है। ऐसे में अब सोमवार या फिर मंगलवार तक ही शालू की रिहाई की संभावना है। पुलिस की हीलाहवाली के चलते शालू को अभी दो और रातें जेल में ही काटनी पड़ेंगी।
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