खून की कमी की वजह से मंडल के सबसे बड़ा जिला अस्पताल उर्सला ही एनीमिक हो गया है। यहां पर इस समय ए और ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप का स्टॉक पूरी तरह शून्य हो चुका है। इसके बावजूद अस्पताल के अफसरों ने बीते डेढ़ माह से खून एकत्र करने के लिए एक भी शिविर का आयोजन नहीं किया है। इस कारण अस्पताल में भर्ती और आसपास के जिलों से आने वाले रोगियों को खून नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल में रोजाना आठ से 10 गंभीर रोगी ब्लड बैंक के चक्कर काटने के बाद बिना खून लिए ही लौटने पर मजबूर हैं। अस्पताल के वार्डों और आईसीयू में भर्ती रोगियों को भी एक यूनिट ब्लड के लिए दो से चार दिन का इंतजार करना पड़ रहा है जिससे उनकी हालत और बिगड़ती जा रही है। तीमारदारों को मजबूरन दलालों या महंगे प्राइवेट ब्लड बैंकों का रुख करना पड़ रहा है। गर्मियों में अक्सर ब्लड बैंकों में रक्त की कमी हो जाती है।
रक्त की कमी अप्रैल से शुरू हो गई थी
अप्रैल में हैलट में ब्लड की कमी हुई] तो अस्पताल प्रशासन ने आननफानन शिविर लगाया तो मेडिकल छात्रों ने बढ़-चढ़कर रक्तदान किया पर उर्सला के अफसरों ने ऐसा नहीं किया। यहां रक्त की कमी अप्रैल से शुरू हो गई थी। अप्रैल की शुरुआत में संस्था ने दो कैंप लगाए लेकिन इसके बाद से अभी तक एक भी कैंप नहीं लगा। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. रिचा ने बताया कि मई में कोई रक्तदान शिविर नहीं लगा। अब जून में शिविर आयोजित करेंगे।
हैलट में भी खून की किल्लत
हैलट में भी इन दिनों खून की किल्लत है। दो दिनों से यहां भी ए पॉजिटिव ब्लड नहीं था, रोगियों को लौटाया जा रहा था। ऐसे में प्राचार्य डॉ. संजय काला के निर्देश पर रक्तदानियों से अपील की गई कि आगे बढ़ें और रक्तदान करें। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. लुबना खान ने बताया कि हमारी अपील के बाद कुछ ए पॉजिटिव लोगों ने रक्तदान किया, अब हम रोगियों के लिए खून की व्यवस्था कर पा रहे हैं।
ब्लड बैंक में ब्लड की कमी इन दिनों काफी है। इसे दूर करने के लिए अब हम अपने संस्थान से ही शुरुआत कर रहे हैं। 14 जून को हम कैंप लगाएंगे और लोगों से अपील करेंगे कि वे आकर रक्तदान करें। -डॉ. सीमा, निदेशक उर्सला