सचेंडी में कानपुर-इटावा नेशनल हाईवे पर बुधवार शाम पंचर खड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराकर बाइक सवार मामा-भांजे की मौत हो गई। वह दोनों भौंती स्थित फैक्टरी से ड्यूटी के बाद बाइक से घर लौट रहे थे। बता दें हाल ही में महाराजपुर में भी हाईवे किनारे खड़े ट्रक से टकराकर स्कॉर्पियो सवार तीन लोगों की मौत हो गई थी।
सचेंडी थाना क्षेत्र में बुधवार शाम करीब सात बजे कानपुर-इटावा नेशनल हाईवे पर अंबेडकर मूर्ति, सैय्यद बाबा मजार के पास एक ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत पंचर होने के कारण खड़ा था। इसी दौरान तेज रफ्तार बाइक पीछे से ट्रॉली में जा घुसी। हमीरपुर के थाना सिसोला के ग्राम बख्छा निवासी मामा सुनील उर्फ सुदामा (21) और फतेहपुर के थाना राधानगर के गांव इंदौली (हाल पता कानपुर देहात के रनियां) निवासी भांजे कृष्णा सोनी (22) की मौत हो गई। फतेहपुर के थाना राधानगर के गांव इंदौली निवासी राकेश सोनी प्राइवेट नौकरी करते हैं। वह बीते 10 वर्षों से कानपुर देहात के रनियां में किराये का कमरा लेकर रह रहे हैं।
परिवार में पत्नी सुमन, शादीशुदा बेटी सुनीता, इकलौता बेटा कृष्णा था। बताया बेटे की शादी 21 अगस्त 2023 को उसकी शादी निशा से हुई थी। एक दो वर्षीय बेटा कुंज है। हमीरपुर निवासी बेटे कृष्णा के मामा सुनील एक महीने पहले गांव से आकर रनियां में उन लोगों के साथ रहने लगे। वह भी बेटे के साथ भौंती स्थित फैक्टरी में आठ दिन पहले से नौकरी करने लगे थे। बुधवार शाम मामा-भांजा अपनी बाइक से हाईवे होते हुए लौट रहे थे। तभी हादसा हो गया। खून से लथपथ दोनों को पुलिस ने अस्पताल भिजवाया जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामा सुनील, अनिल और रवि में मंझला था। घर पर मां शिवकुमारी, तीन बहनें सीता, प्रियंका और प्रांशी हैं। सचेंडी इंस्पेक्टर दीनानाथ मिश्रा ने बताया कि ट्रैक्टर हाईवे किनारे खड़ा था। हादसे के समय चालक ट्रॉली का पंचर बनवाने गया था। मौके से हेलमेट नहीं मिला लेकिन परिजन ने बताया कि कृष्णा बिना हेलमेट बाइक नहीं चलाता था। पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। परिजन अगर तहरीर देते हैं तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
घायल तड़पते रहे, लोग वीडियो बनाते रहे
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के बाद मामा-भांजे करीब 15 मिनट तक सड़क पर तड़पते रहे। इस दौरान कुछ लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाने के बजाय मोबाइल निकालकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया। परिजन का आरोप है कि यदि गोल्डन ऑवर में उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। इसका जवाब तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा लेकिन हादसे के वक्त मौके पर मौजूद लोगों की मदद न करना घटती संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।