पिता से मार्कशीट व दस्तावेज मंगवाए
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि एफआईआर में पीड़िता ने परिजनों के डर से दूसरा नाम लिखाया था। उससे पूछताछ हुई, तो उसने सही जानकारी दी। वह दिसंबर में पहले भी घर से लापता हो गई थी। कुछ ही दिन बाद लौट आई थी। माता-पिता और अन्य रिश्तेदारों की डांट की वजह से मंडुवाडीह स्थित ननिहाल में रह रही थी। करीब पांच दिन पहले वहां से लखनऊ और फिर कानपुर आ गई। शुक्रवार को पीड़िता के मजिस्ट्रेटी बयान नहीं हो सके हैं। उसकी उम्र और अन्य जानकारी हासिल करने के लिए पिता से मार्कशीट व दस्तावेज मंगवाए गए हैं।
चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट जानेंगी मन की बात
पुलिस अधिकारी किशोरी की मनोस्थिति जानने के लिए उसे चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से दिखवाएंगे। चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट पीड़िता के मन की बात जानेंगीं। महिला पुलिस और मिशन शक्ति टीम की पूछताछ में उसने गोलमोल जवाब दिए हैं। पुलिस यह जानना चाह रही है कि आखिर क्या कारण है कि किशोरी अपने घर नहीं जाना चाह रही है। उसे बालिका गृह भेजा गया है। वह वहां रहने के लिए तैयार है। माता पिता से बात भी नहीं करना चाह रही है। पुलिस अधिकारियों ने अंदेशा जताया है कि आरोपियों ने धमकी तो नहीं दी है।
आरपीएफ से मांगा सेंट्रल का सीसीटीवी फुटेज
पुलिस ने आरपीएफ से सेंट्रल स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज मांगे हैं। किशोरी किस समय और कौन सी ट्रेन से आई है इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। उसके साथ कोई और तो नहीं था इसका भी पता लगाया जाएगा। सेंट्रल पर किशोरी को रुपये और मोबाइल नंबर देने वाले युवक से पूछताछ हो चुकी है। उसने मदद के लिए रुपये देने की बात स्वीकारी है।