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Kanpur News: दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर कानपुर अब स्वच्छ शहरों में नंबर पांच पर

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कानपुर। कभी दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शुमार कानपुर अब स्वच्छ शहरों की सूची में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। इस वर्ष प्रदूषण की औसत मात्रा 80 एक्यूआई रही है। पिछले साल यह 120 एक्यूआई थी।
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इतना ही नहीं सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) की सर्वाधिक प्रदूषित 10 शहरों की सूची से भी कानपुर का नाम नहीं है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से रविवार को जारी रिपोर्ट में देश भर के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में राजस्थान के श्रीगंगानगर को रखा गया है।
दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में कानपुर का नाम तीन बार आ चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, 2006, 2016 और 2018 में कानपुर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर था। 2016 में कानपुर में औसत पीएम 2.5 स्तर 173 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था जो इस पर आधा होकर 80 पर पहुंच गया है। लगातार ग्रीनबेल्ट विकसित करने का प्रयास करने से ही प्रदूषण की मात्रा सुधर सकी है। कानपुर में अप्रैल में प्रदूषण की औसत मात्रा 102 और अक्तूबर 123 एक्यूआई है। शनिवार को दर्ज एक दिन की औसत मात्रा करीब 85 एक्यूआई रही। इस तरह से इस साल औसत मात्रा 80 एक्यूआई आंकी गई है। सात पहले यह मात्रा 170 एक्यूआई से ऊपर थी। 50 एक्यूआई तक प्रदूषण की मात्रा सामान्य मानी जाती है।
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2024 में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में सबसे कम प्रदूषित शहरों कानपुर पांचवें स्थान पर रहा था। 2025 में भी यह पांचवें स्थान पर आया। 2019-20 की तुलना में वायु गुणवत्ता इंडेक्स पीएम 10 में 55 प्रतिशत और बीते वर्ष की तुलना में 18.40 प्रतिशत का सुधार हुआ है। हालांकि महानगर में पीएम 10 की अपेक्षा पीएम 2.5 कणों को कम करने में अभी और सुधार की आवश्यकता है। पीएम 2.5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर प्रदूषण की मात्रा पीएम 10 से ज्यादा खतरनाक होती है। इसके कण छोटे होने की वजह से सांस के जरिये सीधे शरीर के अंदर चले जाते है।
इन कणों में नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड और ब्लैक कार्बन जैसे सूक्ष्म प्रदूषक तत्व शामिल होते हैं। ये सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। ये कण फेफड़ों और धमनियों में प्रवेश कर जाते हैं और इनकी वजह से स्ट्रोक, हृदय रोग, फेफड़े का कैंसर, निमोनिया सहित श्वसन संबंधी अन्य संक्रमण का खतरा रहता है। इसकी मुख्य वजह खराब सड़कों से उठने वाली धूल के अलावा सड़कों पर खुले में पड़ी हुई रेत, बालू जैसी निर्माण सामग्रियां, कूड़ा जलाने और खराब वाहनों से निकलने वाला धुआं है।

शहरी क्षेत्र में 219700 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित किया गया ग्रीन बेल्ट
शहर की हवा को शुद्ध करने की दिशा में नगर निगम की ओर से किए गए प्रयासों में शहरी क्षेत्र में 219700 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित किया गया ग्रीन बेल्ट है। इसमें मियावाकी पद्धति से स्थापित किया गया ग्रीन बेल्ट भी शामिल है। साथ ही रोजाना शहर की करीब 720 किमी सड़कों पर जल का छिड़काव और वाटर गन के जरिये हवा में पानी की फुहारें छोड़ी जाती हैं। इसके अलावा कूड़े जलाने पर सख्ती और जुर्माना लगाए जाने की वजह से भी इसमें कमी आई है।
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2025 में औसत प्रदूषण की मात्रा
अप्रैल में 102 एक्यूआई
मई में 84 एक्यूआई
जून में 79 एक्यूआई
जुलाई में 55 एक्यूआई
अगस्त में 55 एक्यूआई
सितंबर में 64 एक्यूआई
अक्टूबर में 123 एक्यूआई

शहर में प्रदूषण को रोकने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर समय-समय पर संबंधित विभागों को गाइड लाइन जारी कर उसका पूरी तरह से पालन कराने को कहा जाता है। प्रदूषण पर रोक लगाने वाले विभागों की कुल संख्या 13 है। -अजीत, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग
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शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। देश के स्वच्छ शहरों की रिपोर्ट में कानपुर को पांचवें स्थान से पहले स्थान पर लाने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। -अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त
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