पुराने गंगा पुल की मरम्मत नहीं हो सकती। केंद्रीय टीम भी इसे जर्जर घोषित कर चुकी है। पीडब्ल्यूडी ने शासन को इस पुल का एक हिस्सा गिरने की सूचना भेज दी है। इसका शेष हिस्सा भी गिराया जाना लगभग तय माना जा रहा है। इसे कब ध्वस्त किया जाएगा, इसके लिए शासन की अनुमति मिलने का इंतजार है। फिलहाल गंगा में गिरा हिस्सा जस का तस पड़ा है, उसे हटाना शुरू भी नहीं किया गया।
गंगा नदी पर कानपुर व उन्नाव जिले को जोड़ने के लिए डेढ़ सौ साल पहले पुल बना था। इसके पिलर (कोठी) संख्या - 2, 7, 10 और 22 में साढ़े तीन साल पहले दरारें पड़ गईं थीं। पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम की जांच के बाद लखनऊ से पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन प्रमुख अभियंता के नेतृत्व में आई टीम ने भी निरीक्षण के बाद इसे जर्जर घोषित कर दिया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर पांच अप्रैल 2021 को इस पुल को यातायात के लिए बंद कर दिया गया था। पुल के दोनों तरफ दीवार भी बना दी गई थी। इसके बाद दिल्ली से सीआरआरआई टीम ने सर्वे कर इसे जर्जर बताया था। पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं के अनुसार उसके बाद इस पुल की मरम्मत की सभी संभावनाएं खत्म हो गई थीं।
पुराने गंगा पुल को साढ़े तीन साल पहले ही जर्जर घोषित कर दिया गया था। इसलिए अब इसके दो पिलर के बीच के हिस्से के गिरने की जांच नहीं की जाएगी। शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। शासन से प्राप्त निर्देशों का पालन किया जाएगा। - रविदत्त, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी