बैठक के दौरान बढे गृह कर के बारे में अधिकारीयों से सवाल करते कांग्रेस पार्षद दल नेता सुहैल
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम सदन की मंगलवार को बैठक शुरू होते ही सत्तापक्ष और विपक्षी दलों के पार्षदों ने मनमाने तरीके से लगाए गए गृहकर और ब्याज का विरोध किया। अधिकारियों को पहले बजट पास कराने की मंशा देख पार्षदों ने एतराज करते हुए सबसे पहले गृहकर पर चर्चा पर जोर दिया। उन्होंने पिछले वर्षों से लगाया गया गृहकर और उसके साथ तभी से लगाए गए ब्याज को खत्म करने की मांग करते हुए हल्ला बोला। इसी बीच महापौर प्रमिला पांडेय की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्होंने इसका हवाला और 25 सितंबर को दोबारा सदन बुलाने का ऐलान करते हुए बैठक स्थगित कर दी।
महापौर ने दोपहर एक बजे सदन की बैठक बुलाई थी पर तब तक 110 में से 45 पार्षद ही आए थे। कोरम पूरा न होने की वजह से बैठक दोपहर 1:25 बजे शुरू हो पाई। बैठक शुरू होते ही नगर निगम का चालू वित्तीय वर्ष (2025-26) का 2835.52 करोड़ रुपये का मूल बजट, जलकल विभाग का चालू वित्तीय वर्ष का 432.99 करोड़ का मूल बजट और इन दोनों विभागों का पिछले वित्तीय वर्ष का पुनरीक्षित बजट पेश किया गया। अपर नगर आयुक्त प्रथम आवेश खान ने एजेंट के प्रस्ताव संख्या एक के तहत बचत पर चर्चा शुरू करने की घोषणा की। कांग्रेस पार्षद दल के नेता सोहेल अहमद ने कहा कि बजट से पहले गृहकर पर चर्चा हो वरना कांग्रेस सदन का बहिष्कार कर देगी। मनमाने तरीके से 2008 तक से गृहकर और उसे पर भी ब्याज लगाकर बिल भेजे जा रहे हैं। वसूली की जा रही है। इससे जनता परेशान है। पिछले वित्तीय वर्षों से लगाया जा रहा बढ़ा हुआ गृहकर और उस पर लगाया जा रहा ब्याज वापस होना चाहिए। भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित ने कहा कि जनता पर जबरन टैक्स लगाया जा रहा है। बढ़े गृह कर का विरोध करते हुए ब्याज माफ करने की मांग की। यह भी कहा कि यदि नगर निगम अपने स्तर से ब्याज माफ नहीं कर सकता तो इसके लिए शासन को पत्र भेजे और उसमें उल्लेख करें कि नगर निगम ने 2022 से टैक्स बढ़ाया पर उसकी वसूली 2016 से ब्याज सहित की जा रही है। इसलिए 2022 से पूर्व से बढ़ाया गया ब्याज माफ किया जाए।
बैठक के दौरान बढे गृह कर के बारे में बताते भाजपा पार्षद नवीन पंडित
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा पार्षद धीरू त्रिपाठी ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी पार्षद एकजुट हैं। बढ़ा टैक्स पिछले वर्षों से लगाया जा रहा है। इसमें आम जनता की क्या गलती है। वह हर साल टैक्स जमा कर रहे हैं। उन्हें पिछले वर्षों के बढ़े हुए टैक्स में भी 10 प्रतिशत की छूट मिले। सोहेल ने सदन में नगर निगम अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि एआरबी बढ़ानी चाहिए और उस पर जनता से आपत्तियां मांगी जाएं। सीधे गृहकर बढ़ा दिया गया है। सुविधा शुल्क लेकर टैक्स कम किया गया है। अवधेश त्रिपाठी, यशपाल सिंह, विकास जायसवाल आदि ने भी कहा कि जनता पर जबरन टैक्स लगाया जा रहा है। इसे ठीक किया जाए।
चर्चा के दौरान नगर आयुक्त सुधीर कुमार ने सदन को बताया कि शासन के आदेश के तहत सन् 2016 में गृहकर संशोधित हुआ था। इसके बाद 2022 में जीआईएस सर्वे हुआ। जो लोग कम गृहकर दे रहे हैं, जहां घरों में निर्माण हुआ है या आवासीय में व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है उसी आधार पर पिछले दो वर्षों से गृहकर बढ़ा है। पूरे यूपी में टैक्स बढ़ा है। बिलों में गड़बड़ी है, किसी को आपत्ति है तो उनके निस्तारण के लिए वार्डों में शिविर लगा देंगे। कोशिश की जाएगी कि एक महीने में सभी जगह शिविर लग जाएं।
कुछ पार्षद गृहकर का मुद्दा छोड़कर एक साल में किए गए भुगतानों की जांच पर जोर देने लगे। इस दौरान महापौर की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्होंने तबीयत का हवाला देते हुए सदन की बैठक स्थगित कर दी। कहा कि 25 सितंबर को दोबारा बैठक बुलाई जाएगी। बजट पास नहीं हुआ है।