फर्जी बैनामों पर लगेगी रोक
पिछले एक वर्ष से सरकार ने नवीनीकरण पर रोक लगा रखी है। इस दौरान भूमि का व्यापक सर्वे कराया जा रहा है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। ऑनलाइन खतौनी से स्वामित्व और पट्टा अवधि पारदर्शी रूप से उपलब्ध होगी। उप निबंधक कार्यालयों को भी जानकारी सीधे मिलेगी, जिससे फर्जी बैनामों पर रोक लगेगी।
क्या है नजूल भूमि
नजूल भूमि वह जमीन है जो ब्रिटिश काल में राजा-महाराजाओं के पास थी। आजादी के बाद यह जमीन सरकार के अधिकार में आ गई। सरकार इस भूमि का उपयोग सार्वजनिक हित में जैसे स्कूल, कॉलेज और अस्पताल के लिए करती है। आमतौर पर ऐसी जमीन नब्बे साल के पट्टे पर दी गई थी, जिसका नवीनीकरण हर तीस साल में करना होता है। ऑनलाइन खतौनी व्यवस्था से नजूल भूमि से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
अभी नान जेडए (आवासीय या निजी पट्टे की जमीन) की भूमि की खतौनियां ऑनलाइन दर्ज की जा रही हैं। इसके बाद नजूल की संपत्तियां भी ऑनलाइन दर्ज होंगी। जिससे रिकॉर्ड आनलाइन हो सके। -डॉ. विवेक चतुर्वेदी, एडीएम वित्त