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Kanpur: नजूल भूमि फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम, खतौनी होगी ऑनलाइन, एक क्लिक पर दिखेगा ब्योरा, एडीएम ने कही ये बात

Thu, 16 Apr 2026 10:26 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: नजूल भूमि पर फर्जीवाड़े और अवैध कब्जों को रोकने के लिए सरकार अब खतौनी ऑनलाइन कर रही है, जिससे 1465 संपत्तियों का रिकॉर्ड पारदर्शी होगा।
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सांकेतिक - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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प्रदेश सरकार नजूल भूमि में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए बड़ा कदम उठा रही है। अब नजूल भूमि की खतौनी ऑनलाइन की जाएंगी, जिससे जमीन का पूरा ब्योरा एक क्लिक पर मिलेगा। यह व्यवस्था अगले एक से दो माह में लागू होने की तैयारी है। जिले में कुल 1465 नजूल संपत्तियां हैं, जिनका क्षेत्रफल करीब 38.76 लाख वर्ग मीटर है।

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इन जमीनों पर लंबे समय से अवैध कब्जे और फर्जी बिक्री की शिकायतें मिल रही थीं। हाल ही में जिला प्रशासन ने सिविल लाइंस क्षेत्र की 24.77 करोड़ रुपये कीमत की नजूल भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया है। नजूल भूमि के पट्टों का नवीनीकरण सामान्यतः तीस-तीस साल के अंतराल पर दो बार होता है।

फर्जी बैनामों पर लगेगी रोक
पिछले एक वर्ष से सरकार ने नवीनीकरण पर रोक लगा रखी है। इस दौरान भूमि का व्यापक सर्वे कराया जा रहा है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। ऑनलाइन खतौनी से स्वामित्व और पट्टा अवधि पारदर्शी रूप से उपलब्ध होगी। उप निबंधक कार्यालयों को भी जानकारी सीधे मिलेगी, जिससे फर्जी बैनामों पर रोक लगेगी।

क्या है नजूल भूमि
नजूल भूमि वह जमीन है जो ब्रिटिश काल में राजा-महाराजाओं के पास थी। आजादी के बाद यह जमीन सरकार के अधिकार में आ गई। सरकार इस भूमि का उपयोग सार्वजनिक हित में जैसे स्कूल, कॉलेज और अस्पताल के लिए करती है। आमतौर पर ऐसी जमीन नब्बे साल के पट्टे पर दी गई थी, जिसका नवीनीकरण हर तीस साल में करना होता है। ऑनलाइन खतौनी व्यवस्था से नजूल भूमि से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
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अभी नान जेडए (आवासीय या निजी पट्टे की जमीन) की भूमि की खतौनियां ऑनलाइन दर्ज की जा रही हैं। इसके बाद नजूल की संपत्तियां भी ऑनलाइन दर्ज होंगी। जिससे रिकॉर्ड आनलाइन हो सके।  -डॉ. विवेक चतुर्वेदी, एडीएम वित्त
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