उन्होंने पूर्व मंत्री भगवती सागर के रतनलालनगर में हुए निजी कार्यक्रम में शिरकत की। इस मौके पर पत्रकारों से बोले कि उन्हें रामचरितमानस से मतलब नहीं है। इसके अलावा रामचरितमानस की प्रतियां भी नहीं जलाई गईं। लोगों ने नारे लिखी दफ्ती जलाई थी। किसी को अपमानित करना धर्म नहीं होता। धर्म मानव कल्याण के लिए होता है। यह पूछने पर कि कुछ धर्मगुरु उन्हें चौपाई का अर्थ समझाने की बात कह रहे हैं।
इस पर बोले कि कुछ ढोंगी बाबाओं की हकीकत सामने आ गई है। वह महिलाओं, अनुसूचित जाति और आदिवासियों को सम्मान दिलाने के लिए आवाज उठा रहे हैं। महासचिव बनने के पहली बार नगर आगमन पर सपाइयों ने गंगापुल पर उनका स्वागत किया। इस दौरान वह नेताओं से कुछ नहीं बोले।