न तो कान में कैंसर है और न ही पहले कोई ट्यूमर था
अगले दिन क्लीनिक लाकर वहां से डिस्चार्ज कर दिया। दर्द खत्म न होने पर किशन दोबारा डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने कान में कैंसर की बात बताई। 27 अप्रैल को किशन ने दूसरे डॉक्टर को दिखाया, तो पता चला कि न तो कान में कैंसर है और न ही पहले कोई ट्यूमर था।
लापरवाही पाते हुए जुर्माना लगाया
इस पर किशन ने नौ जुलाई 2015 को डॉ. एनएस वाल्दिया के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर कराया था। आयोग का नोटिस मिलने पर डॉ. वाल्दिया ने जवाब दाखिल करते हुए कहा कि ऑपरेशन से पहले किशन को बता दिया गया था कि उसकी कान की नसें सूख चुकी हैं। फिर भी सबूतों के आधार पर आयोग ने इसे डॉक्टर की लापरवाही पाते हुए उन पर जुर्माना लगाया।